मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पुराने, कटे-फटे और चलन से बाहर हो चुके नोटों के निपटारे को लेकर एक क्रांतिकारी और पर्यावरण के अनुकूल कदम उठाया है. अब इन बेकार नोटों को जलाने या सड़ाने की बजाय दोबारा उपयोग में लाकर फर्नीचर तैयार किए जाएंगे. RBI की ताजा वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, हर साल लगभग 15,000 टन ऐसे नोट इकट्ठा होते हैं जिन्हें पहले महंगे और प्रदूषणकारी तरीकों से नष्ट किया जाता था. अब इन नोटों को बारीक कतरनों में बदलकर पार्टिकल बोर्ड बनाने वाली कंपनियों को बेचा जाएगा.
फर्नीचर उद्योग को मिलेगा सस्ता और टिकाऊ कच्चा माल
पार्टिकल बोर्ड एक प्रकार की इंजीनियर्ड वुड होती है, जो लकड़ी की कतरनों, चूरे और राल के मिश्रण से तैयार की जाती है. अब इसमें पुराने नोटों की कतरन का भी समावेश होगा. इससे कुर्सी, मेज, अलमारी जैसे टिकाऊ फर्नीचर बनाए जाएंगे. इस पहल को पर्यावरण हित में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन वुड साइंस एंड टेक्नोलॉजी संस्थान ने भी इस प्रयोग को व्यावहारिक और प्रभावी बताया है. यह तरीका न सिर्फ कचरे का पुनर्चक्रण है, बल्कि बैंक के खर्च को घटाने और आमदनी बढ़ाने की दिशा में भी एक रचनात्मक पहल है.
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