Jagdeep Dhankhar resigned: उपराष्ट्रपति धनखड़ ने अचानक छोड़ा पद, भाजपा के सामने है यह दोहरी चुनौती

नई दिल्ली:  देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार रात (21 जुलाई) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. न्होंने अपने त्यागपत्र में स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी. मॉनसून सत्र की शुरुआत में आया यह इस्तीफा राजनीतिक हलकों में हैरानी का कारण बना. अपने पत्र में धनखड़ ने लिखा कि वह डॉक्टरों की सलाह का पालन करते हुए और स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देते हुए पद से हट रहे हैं. उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 67(ए) का उल्लेख करते हुए तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देने की बात कही. साथ ही, अपने कार्यकाल के दौरान मिले सहयोग के लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सांसदों के प्रति आभार जताया.

हालांकि, उन्होंने अपनी बीमारी की सटीक प्रकृति का खुलासा नहीं किया. यह अस्पष्टता लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर रही है.

धनखड़ के इस्तीफे के साथ ही भारतीय जनता पार्टी के सामने अब दो बड़ी जिम्मेदारियां आ गई हैं. पहला – पार्टी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनना है. दूसरा – देश को नया उपराष्ट्रपति देना है.

पार्टी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा का कार्यकाल जनवरी 2023 में समाप्त हो चुका था. हालांकि 2024 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए उनका कार्यकाल बढ़ा दिया गया था. अब जबकि चुनाव हो चुके हैं, भाजपा अध्यक्ष पद को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी होगी. फिलहाल नड्डा कार्यकारी अध्यक्ष की भूमिका निभा रहे हैं.

भाजपा को कैसा चाहिए उपराष्ट्रपति?
अनुभव और रणनीतिक दृष्टिकोण जरूरी
भाजपा उपराष्ट्रपति पद के लिए ऐसे व्यक्ति की तलाश में होगी जो न केवल संवैधानिक जिम्मेदारियों को समझता हो, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी पार्टी की भविष्य की दिशा तय करने में सहायक हो. पार्टी का ध्यान 2029 के आम चुनावों तक की रणनीति पर केंद्रित रहेगा.

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 68(2) के अनुसार, उपराष्ट्रपति की मृत्यु, इस्तीफे या पद रिक्त होने की स्थिति में चुनाव शीघ्र कराना आवश्यक है. धनखड़ के इस्तीफे के बाद यह प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी.

उपराष्ट्रपति बनने की शर्तें क्या हैं?

  • उम्मीदवार भारत का नागरिक हो.
  • उसकी आयु कम से कम 35 वर्ष हो.
  • वह राज्यसभा सदस्य बनने के लिए योग्य हो.
  • वह भारत सरकार, राज्य सरकार या किसी स्थानीय निकाय में लाभ के पद पर कार्यरत न हो.

पद की प्रकृति
उपराष्ट्रपति देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है. उनका कार्यकाल पांच वर्षों का होता है. हालांकि, कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी वे तब तक पद पर बने रह सकते हैं, जब तक कि उत्तराधिकारी पद ग्रहण न कर ले.

 

इसे भी पढ़ें :

83 वर्ष के हुए कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge, संसद में मना जन्मदिन – प्रियंका गांधी ने बनाया खास केक
Spread the love
  • Related Posts

    Bahragora : पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की पुत्री दुखनी सोरेन ने थाना प्रभारी से की शिष्टाचार भेंट, क्षेत्र की विधि-व्यवस्था पर की चर्चा

    बहरागोड़ा : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं सरायकेला विधायक चंपई सोरेन की पुत्री दुखनी सोरेन ने गुरुवार को बहरागोड़ा थाना पहुंचकर थाना प्रभारी शंकर कुशवाहा से शिष्टाचार मुलाकात की और…

    Spread the love

    Jamshedpur : सात वर्ष पहले बनी पानी टंकी में अब तक नहीं हुआ पेयजल कनेक्शन, विधायक सरयू राय ने किया निरीक्षण

    जमशेदपुर : जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने बुधवार को मानगो पेयजल परियजोना के अंतर्गत निर्मित बालीगुमा पानी टंकी का निरीक्षण किया। यह टंकी बीते 7 वर्षों से बन…

    Spread the love

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    Share this Page

    Slide-In Box help you to share the page on the perfect time