Saraikela: दलमा सेंचुरी में साल पेड़ों की कटाई पर बवाल, DFO को सौंपा ज्ञापन

सरायकेला:  सरायकेला के मकुलकोचा स्थित दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में सैकड़ों की संख्या में साल के पेड़ काट दिए गए। ग्रामीणों का आरोप है कि पेड़ काटकर लकड़ी गायब कर दी गई और इसका कोई हिसाब नहीं है। इस मामले में ग्रामीणों ने डीएफओ को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि पश्चिम बंगाल के अयोध्या बाघमुंडी फॉरेस्ट की तरह यहां लकड़ी का भंडारण क्यों नहीं किया गया। वन विभाग के रेंजर दिनेश चंद्रा का कहना है कि यह जांच का विषय है।

सड़क की बदहाली से जूझते आदिवासी गांव
दलमा सेंचुरी के तराई में बसे आदिवासी गांवों के लोग जिला मुख्यालय जाने के लिए भारी परेशानी उठा रहे हैं। चाकुलिया से मुख्य चेकनाका जाने वाली सड़क जर्जर हालत में है। जगह-जगह गड्ढों में पानी भर जाने से दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है।

यह सड़क ग्रामीणों के लिए अस्पताल, न्यायालय और सरकारी कार्यालय तक पहुंचने का मुख्य साधन है। गर्भवती महिलाओं और बीमार मरीजों को कीचड़ भरे रास्तों से ले जाना पड़ रहा है।

पर्यटन पर असर
दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी देश-विदेश के पर्यटकों का आकर्षण केंद्र है। लेकिन खराब सड़कों और सुविधाओं की कमी से पर्यटन पर बुरा असर पड़ रहा है।

गज परियोजना पर सवाल
दलमा गज परियोजना से जुड़ा क्षेत्र है, लेकिन हाथियों की सुरक्षा और संरक्षण पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों का विचरण क्षेत्र लगातार कम हो रहा है और पिछले पांच वर्षों से हाथियों के झुंड यहां से पलायन कर गए हैं। अब कभी-कभी एक-दो हाथी ही देखने को मिलते हैं।

 

बैठक में उठे मुद्दे
मकुलकोचा चेकनाका स्थित हिरण पार्क गेस्ट हाउस में झारखंड मुक्ति वाहिनी के संयोजक चंदन सिंह की अध्यक्षता में एक बैठक हुई। इसमें ग्रामीणों ने कई मुद्दे उठाए —
सड़क की मरम्मत और मूलभूत सुविधाओं की मांग
जंगल में आग लगने पर ग्रामीणों को सुरक्षा उपकरण न दिए जाने पर आपत्ति
मजदूरी का समय पर भुगतान न होना
आदिवासी गांवों के विकास कार्यों में उपेक्षा
गुजरात की तरह इको सेंसिटिव जोन के लिए विशेष योजनाओं की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि इको सेंसिटिव क्षेत्र होने के कारण विकास कार्य बाधित हो रहे हैं। वे चाहते हैं कि यहां भी गुजरात की तरह योजनाएं लागू हों, ताकि आदिवासी समाज को रोज़गार और विकास का अवसर मिल सके।

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