- बड़ा राईका गांव में शोक, स्मृति में प्रतिमा लगाने की घोषणा
गुवा : ऐतिहासिक 1980 के गुवा गोलीकांड के आंदोलनकारी एवं बड़ा राईका गांव निवासी दरगड़ाय सिरका के निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। बीते 8 दिसंबर को उनके निधन के बाद गांव सहित आसपास के इलाकों में गमगीन माहौल बना हुआ है। गुवा गोलीकांड की पीड़ा और संघर्ष के साक्षी रहे दरगड़ाय सिरका को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कई वरिष्ठ नेता बड़ा राईका गांव पहुंचे। इस दौरान नेताओं और ग्रामीणों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके संघर्षमय जीवन को याद किया।
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आंदोलनकारी आयोग के सदस्य और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में आंदोलनकारी चिन्हित आयोग के सदस्य भुवनेश्वर महतो, जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सुरेन, रिमू बहादुर, शंकर बोबोंगा, सोनू हरिवंश, रमेश सिरका, निरंजन सिरका सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने कहा कि दरगड़ाय सिरका का जीवन आदिवासी अधिकार, न्याय और संघर्ष की मिसाल है। इस अवसर पर ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए गांव में उनकी प्रतिमा स्थापित करने तथा हर वर्ष 8 सितंबर को श्रद्धांजलि दिवस मनाने की मांग रखी। ग्रामीणों की भावना को देखते हुए जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सुरेन ने प्रतिमा स्थापना की पूरी जिम्मेदारी लेने का आश्वासन दिया और जल्द कार्य पूरा करने की घोषणा की।
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गुवा गोलीकांड : इतिहास और विरासत
ज्ञात हो कि दरगड़ाय सिरका उन साहसी आंदोलनकारियों में शामिल थे, जिन्होंने गुवा गोलीकांड के दौरान आदिवासियों के अधिकार और न्याय की मांग को लेकर हुए आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। आंदोलन के दौरान पुलिस की गोली उनके गाल को चीरते हुए आर-पार निकल गई थी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद उनका पूरा जीवन संघर्ष और इलाज में बीता। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए उनके इलाज की जिम्मेदारी उठाई थी और उन्हें रांची के रिम्स में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद वे घर लौटे, लेकिन लगातार गिरती सेहत के कारण 8 दिसंबर को उनका निधन हो गया। उनके निधन से गुवा गोलीकांड के संघर्ष इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया, लेकिन उनका बलिदान और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।