- 5,000 रुपये मासिक सहायता के सरकारी दावे पर उठे गंभीर संदेह
झाड़ग्राम : पश्चिम बंगाल सरकार की प्रवासी मजदूर कल्याण योजना को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत सामने आई जानकारी ने योजना के जमीनी क्रियान्वयन पर संदेह बढ़ा दिया है। हाल ही में मुख्यमंत्री द्वारा यह दावा किया गया था कि राज्य के करीब 31 लाख प्रवासी मजदूरों को हर महीने 5,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इस दावे की सत्यता जानने के लिए जंगलमहल स्वराज मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष अशोक महतो ने आरटीआई आवेदन दायर किया था। आरटीआई से मिले जवाब में झाड़ग्राम जिले की स्थिति ने सरकारी दावे और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर उजागर कर दिया है, जिससे योजना की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।
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आरटीआई से उजागर हुई सरकारी योजनाओं की हकीकत
आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार, झाड़ग्राम जिले में योजना के तहत फिलहाल एक भी प्रवासी मजदूर को 5,000 रुपये की मासिक सहायता नहीं मिल रही है। जबकि जिले में कुल 9,365 प्रवासी मजदूर पंजीकृत हैं। इनमें से 700 स्थायी और 8,665 अस्थायी रूप से पंजीकृत बताए गए हैं। इसके बावजूद किसी को भी योजना का लाभ न मिलना तकनीकी खामियों और प्रशासनिक उदासीनता की ओर इशारा करता है। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि झाड़ग्राम में प्रवासी मजदूरों की वास्तविक संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक है। इससे यह आशंका गहराती है कि बड़ी संख्या में मजदूर आज भी सरकारी योजनाओं की पहुंच से बाहर हैं।
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झाड़ग्राम में प्रवासी मजदूरों की अनदेखी
हाल ही में संकराइल प्रखंड के एक प्रवासी मजदूर की दूसरे राज्य में काम के दौरान मौत हो गई थी। परिवार से संपर्क करने पर पता चला कि वह मजदूर सरकारी योजना में पंजीकृत ही नहीं था। इससे यह सवाल और गहरा गया है कि कितने प्रवासी मजदूर वास्तव में सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं। यदि राज्य सरकार के दावे के अनुसार 31 लाख प्रवासी मजदूरों को हर महीने 5,000 रुपये दिए जा रहे हैं, तो इस पर करीब 1,550 करोड़ रुपये प्रतिमाह और लगभग 18,600 करोड़ रुपये सालाना खर्च होंगे। यह राज्य की सबसे बड़ी कल्याणकारी योजनाओं में से एक मानी जाएगी। इन तथ्यों के सामने आने के बाद जिला-वार आंकड़े सार्वजनिक करने और यह स्पष्ट करने की मांग उठ रही है कि वास्तव में कितने मजदूरों को योजना का लाभ मिल रहा है। अशोक महतो ने कहा कि जब तक पारदर्शी और तथ्यात्मक जानकारी सामने नहीं आती, तब तक योजना के क्रियान्वयन पर सवाल बने रहेंगे।