रेलवे यात्रियों के गले पर छुरी रख कर लाभ कमाना चाहता है
रेलवे शुभ लाभ के स्थान पर लोभ लाभ को चरितार्थ कर रहा है
मंडल स्तर से जोन स्तर तक इतनी समितियों के बावजूद ट्रेनें लेट क्यों
7 अप्रैल को टाटानगर जंक्शन पर सुबह 10 बजे से धरना में जनभागीदारी की अपील
जमशेदपुर : रेलवे की राजशाही और पीड़क मानसिकता को खत्म करना होगा। जनता ही उस मानसिकता पर लगाम लगा सकती है। जनता को होने वाली पीड़ा रेलवे को दिखती नहीं। अब जनता को ही आगे आना होगा। तभी रेलवे में सुधार होगा। रेलवे जनता के गले पर छुरी चला कर अपनी कमाई बढ़ाना चाहता है, सफलता पाना चाहता है। उक्त बातें जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने शनिवार को सोशल मीडिया पर कही।
सरयू राय ने कहा कि रेलवे का ध्यान ‘लोभ’ के साथ ‘लाभ’ पर है। लोभ ये है कि मालगाड़ियों से ज्यादा भाड़ा वसूला जाए जो उसके लाभ को बढ़ाए। उन्होंने कहा कि पहले ‘शुभ लाभ’ के तहत व्यापारी काम करते थे कि काम शुभ तरीके से हो और लाभ मिले। रेलवे ने इस शुभ लाभ को लोभ लाभ में बदल दिया है।
श्री राय ने कहा कि टाटानगर जंक्शन से 10-15 किलोमीटर पहले तक सभी एक्सप्रेस-सवारी गाड़ियां प्रायः समय से आती हैं लेकिन 10-15 किलोमीटर के बाद से गाड़ियां निरंतर लेट होती चली जाती हैं। यह आज से नहीं है। कई वर्षों से है। लोगों का कहना है कि रेलवे मालगाड़ियों को निकालने के चक्कर में सवारी ट्रेनों को स्थान-स्थान पर घंटों खड़ी कर देता है।
सरयू राय ने कहा कि 7 तारीख को टाटानगर जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर 1 के पास विशाल धरना आयोजित किया जा रहा है। इस धरना में जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो भी उपस्थित होकर अपनी बात रखेंगे तो ज्यादा अच्छा होगा। उन्होंने कहा कि यह आम जनता से जुड़ा मुद्दा है। हम लोगों ने इसे उठाया, इसलिए इसे किसी पार्टी का धरना न मानकर आम जन की भागीदारी के रुप में देखें और हर पार्टी के लोग इसमें शामिल हों। उन्होंने हर पार्टी को इस संबंध में पत्र भी लिखा है।
सरयू राय ने कहा कि रेलवे ने यात्रियों की सुख-सुविधा, ट्रेनों के परिचालन आदि से संबंधित कई समितियां बना रखी हैं जो रेल मंडल से लेकर रेलवे जोन तक कार्यरत हैं। उन्होंने कहाः मैं समझ नहीं पाता कि इतनी समितियों के होने के बावजूद आखिर क्या कारण है कि सवारी ट्रेनें टाटानगर जंक्शन पर समय से नहीं पहुंच पाती हैं? इन समितियों के उद्देश्य को पढ़ें तो साफ प्रतीत होता है कि ये रेल यात्रियों के भले के लिए बने हैं लेकिन जब हम अमल की बात करते हैं तो परिणाम नकारात्मक ही निकलता है।

श्री राय ने कहा कि कई बार ट्रेनों की लेत-लतीफी में वह खुद भी फंसे हैं। चार-चार, पांच-पांच घंटे ट्रेनें खड़ी रही हैं। सोच कर देखें, निम्न तबके के लोगों पर इसका कितना प्रतिकूल असर पड़ता है। कई ट्रेनें चांडिल में ही घंटों रुकी रहती हैं। जिन भाईयों को रोजी-रोटी के सिलसिले में जमशेदपुर आना है, वह कैसे चांडिल से टाटानगर आएगा? एक दिन की बात होती तो गनीमत थी। यहां तो वर्षों से यही लेट-लतीफी चली आ रही है। इस चक्कर में कई मजदूरों की नौकरी छूट गई। श्री राय का मानना था कि ट्रेनों की लेटलतीफी के कारण सबसे ज्यादा परेशान मजदूर तबका हुआ है जो ट्रेनों में बैठ कर निकटवर्ती इलाकों से चल कर नौकरी करने जमशेदपुर आता था।
सरयू राय ने कहा कि ट्रेनों में बैठ कर अपने गंतव्य की तरफ लौटने वाले यात्रियों की पीड़ा रेलवे कभी नहीं समझ सकता। रेलवे उस दर्द को कभी नहीं समझ सकता, जिसमें ट्रेन में बैठा यात्री पांच-पांच, छह-छह घंटे सिर्फ इस इंतजार में रहता है कि कब ट्रेन खुले और वह अपने घर पहुंचे। रेलवे एक तरीके से उनका मानसिक रुप से शोषण करता है, प्रताड़ित करता है। इसी शोषण और प्रताड़ना के खिलाफ 7 अप्रैल को विशाल धरना का आयोजन किया जा रहा है।
इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : टाटा मोटर्स के फाइनल डिवीजन में सम्मान समारोह आयोजित



















































