पुरूलिया : 15 वर्षों तक घर से दूर रहकर परिवार का पेट पालने वाले प्रवासी श्रमिक बिरिंची कर्मकार के अचानक मौत ने पत्नी और तीन बच्चों को आर्थिक संकट के बीच ला खड़ा किया है। 43 वर्षीय बिरिंची की 8 सितंबर को आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में कथित रूप से स्ट्रोक से मौत हो गई। अब परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि घर का खर्च कैसे चलेगा और बच्चों का भविष्य कैसे संभलेगा।
बड़ाबाजार प्रखंड के सिंदरी ग्राम पंचायत के अयोध्याडीह निवासी बिरिंची लंबे समय से गाजुवाका ऑटो नगर में काम कर रहे थे। उनकी मौत के बाद पत्नी, दो बेटियों और एक बेटे के सामने आय का प्रमुख स्रोत खत्म हो गया है। इसी संकट को देखते हुए जंगलमहल स्वराज मोर्चा ने पुरुलिया जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को लिखित आवेदन भेजकर मानवीय आधार पर आर्थिक सहायता की मांग की है।
मोर्चा के अनुसार, बिरिंची प्रवासी श्रमिक कल्याण योजना में पंजीकृत नहीं थे। संगठन ने मांग की है कि पंजीकरण नहीं होने के बावजूद परिवार की वास्तविक स्थिति का सत्यापन कर उसे पात्र सरकारी राहत और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जाए। मोर्चा केंद्रीय समिति सदस्य अरित्र महतो ने कहा कि कमाने वाले सदस्य की आकस्मिक मौत के बाद परिवार को सरकारी मदद के लिए भटकने नहीं दिया जाना चाहिए।
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