
गुजरात: गुजरात में महिसागर नदी पर बना चार दशक पुराना गंभीरा पुल रविवार को अचानक ढह गया. इस हादसे में अब तक 5 वाहन नदी में गिर चुके हैं, जिनमें से दो ट्रक पूरी तरह डूब गए और एक टैंकर आधा लटक गया. अभी तक 3 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 5 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है.
पुल की जर्जर स्थिति की पहले से थी चेतावनी
बताया जा रहा है कि यह पुल वर्ष 1981 में बनाया गया और 1985 में इसे आम जनता के लिए खोला गया था. समय के साथ इसकी हालत अत्यंत जर्जर हो चुकी थी. स्थानीय विधायक चैतन्य सिंह झाला ने पुल की गंभीर स्थिति को देखते हुए कई बार चेतावनी दी थी और एक नए पुल के निर्माण की मांग की थी.
चेतावनी के बावजूद, प्रशासन की ओर से पुल पर यातायात बंद नहीं किया गया. नतीजा यह हुआ कि भारी वाहन इसी पुल से गुजरते रहे और आखिरकार एक भीषण हादसा सामने आया.
हादसे के बाद तुरंत शुरू हुआ रेस्क्यू
पुल गिरते ही आसपास हड़कंप मच गया. राहत और बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर नदी में गिरे वाहनों को हटाने और फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया. तैराकों की मदद से शवों की तलाश की जा रही है.
मुख्यमंत्री ने दिए जांच के निर्देश
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने हादसे को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी विशेषज्ञों की एक टीम घटनास्थल पर भेजी है. उन्होंने सड़क एवं भवन विभाग को भी इस पूरे मामले की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है.
विभागीय सचिव पी. आर. पटेलिया ने कहा कि उन्हें पुल के क्षतिग्रस्त होने की सूचना पहले मिली थी. विभागीय टीम को मौके पर भेजा गया है, जो तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है.
अब बना रहेगा सवाल: क्या यह त्रासदी टाली जा सकती थी?
इस दुर्घटना ने एक बार फिर राज्य की पुरानी व जर्जर अधोसंरचनाओं की ओर ध्यान खींचा है. यदि समय रहते चेतावनी पर अमल होता और पुल को बंद कर दिया जाता, तो शायद यह त्रासदी टाली जा सकती थी. अब सरकार ने 212 करोड़ रुपये की लागत से नए पुल के निर्माण को मंजूरी दे दी है और उसके लिए सर्वेक्षण का काम भी पूरा हो चुका है.
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