Bharat Bandh: केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का राष्ट्रव्यापी भारत बंद आज, जानिए क्या हैं उनकी मांगे

नई दिल्ली:  10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने मिलकर आज राष्ट्रव्यापी भारत बंद का आह्वान किया है, जिसमें लगभग 25 करोड़ श्रमिकों और ग्रामीण मजदूरों के शामिल होने का दावा किया गया है  यह हड़ताल केंद्र सरकार की उन नीतियों के खिलाफ है जिन्हें यूनियनों ने ‘मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी और कॉरपोरेट-समर्थक’ करार दिया है

मांगें—क्या है मामला?
ट्रेड यूनियनों ने सरकार को 17 सूत्रों वाला चार्टर ऑफ डिमांड्स सौंपा था, लेकिन उनका आरोप है कि इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई
मुख्य मुद्दे हैं:

  1. चार नए लेबर कोड—जो हड़ताल के अधिकार को सीमित करते हैं, काम के घंटे बढ़ाते हैं और नौकरी सुरक्षा कमजोर करते हैं। यूनियनों का कहना है कि ये कोड उन्हें अनुपालन करने में बाधा डालते हैं
  2. बिजली कंपनियों का निजीकरण—इसके चलते सार्वजनिक क्षेत्र को नुकसान और कर्मचारियों की नौकरी जोखिम में है .
  3. न्यूनतम वेतन ₹26,000 मासिक, पुरानी पेंशन स्कीम, MSP की कानूनी गारंटी और कर्जमाफी की मांग
  4. बेरोजगारी, महंगाई, प्रवासी मजदूरों की वोटर लिस्ट से बेदखली इत्यादि पर भी विरोध जारी है

प्रमुख शामिल संगठन
AITUC, INTUC, CITU, HMS, TUCC, SEWA, LPF, UTUC, AIUTUC

समर्थन में किसान समूह: संयुक्त किसान मोर्चा
सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी: रेलवे, NMDC, स्टील

किस क्षेत्र में होंगे असर?
बैंकिंग और बीमा: सेवाएं प्रभावित, हालांकि बैंक अवकाश नहीं
डाक सेवाएं, कोयला खनन, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, उद्योग और बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है
ट्रेन सेवाएं: आधिकारिक हड़ताल नहीं है, पर ट्रेन लेट होने और रास्तों में रुकावट की संभावनाएं बनी हुई हैं
स्कूल, कॉलेज और निजी कार्यालय खुले रह सकते हैं

आपके दैनिक जीवन पर क्या असर?

  1. बैंक और एटीएम में लेन-देन में देरी हो सकती है.
  2. बिजली कट और आपूर्ति में असर संभव है क्योंकि बिजली क्षेत्रों के 27 लाख कर्मचारी शामिल हैं
  3. सार्वजनिक परिवहन में व्यवधान, ट्रैफिक जाम और कॉल टैक्सी/ऑटो में रुकावट संभव है .
  4. रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा बढ़ाई गई है, लेकिन फिर भी यात्रा में देरी हो सकती है .

यह भारत बंद (9 जुलाई 2025) श्रमिक, किसान, बिजली और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों सहित लगभग 25 करोड़ भागीदारों के साथ एक बड़ा आंदोलन साबित हो रहा है. इसका उद्देश्य बेरोजगारी, महंगाई, लेबर कोड, निजीकरण और न्यूनतम मजदूरी जैसे सवालों पर सरकार को जवाबदेह बनाना है. इसके प्रभाव का आकलन आज शाम के बाद संभव होगा कि हड़ताल कितनी सफल रही और कौन-कौन से क्षेत्रास्तर प्रभावित हुए.

 

इसे भी पढ़ें : Bihar: मतदाता सूची के पुनरीक्षण के खिलाफ राहुल-तेजस्वी के नेतृत्व में सड़क पर उतरे विपक्षी, पप्पू यादव का जोशीला प्रदर्शन

 

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