Jadugoda : पेसा कानून में बदलाव की मांग को लेकर गालूडीह बराज पर जोरदार प्रदर्शन

  • माझी परगना महाल व भूमिज मुडा ने बुलंद किया हमारा गांव, हमारा राजका नारा

जादूगोड़ा : राज्य सरकार द्वारा पेसा कानून में किए गए बदलाव के विरोध में माझी परगना महाल व भूमिज मुडा के नेतृत्व में शुक्रवार को गालूडीह बराज पर जोरदार प्रदर्शन किया गया। इस दौरान “हमारा गांव में हमारा राज” के नारे गूंजते रहे। प्रदर्शन से पहले गालूडीह, घाटशिला, जादूगोड़ा और पोटका क्षेत्र से बड़ी संख्या में माझी बाबा और ग्राम प्रधानों की बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता माझी परगना महाल के देश विचारक बहादुर सोरेन ने की। बैठक में पेसा कानून से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई और राज्य सरकार की नीति के खिलाफ एकजुट होकर आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया गया।

इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : बागुनहातु के सरकारी विद्यालय में आगजनी, कक्षा एक का कमरा जलकर राख

गांव-गांव जाकर पेसा कानून की खामियों पर होगा जागरूकता अभियान

इस अवसर पर सिदेश्वर सरदार, हरीश सिंह भूमिज और सुधीर सोरेन ने कहा कि पेसा कानून में व्याप्त खामियों को लेकर जल्द ही गांव-गांव भ्रमण किया जाएगा और ग्रामीणों को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस दौरान समाज के विचारों को एकत्रित कर संशोधित पेसा कानून का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा, जिसे झारखंड के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा। वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि जब तक आदिवासी समाज की सहमति से कानून नहीं बनेगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

इसे भी पढ़ें : Potka : 47 साल पुराने जर्जर बिजली खंभे और नंगे तार बने जानलेवा

1996 के मूल पेसा कानून को लागू करने की मांग

सिदेश्वर सरदार ने कहा कि पेसा कानून रूढ़ि परंपरा, सामाजिक व्यवस्था और सामुदायिक प्रबंधन के आधार पर बनना चाहिए, तभी आदिवासी समाज इसे स्वीकार करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने पेसा कानून को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया है, जिसमें रूढ़ि परंपराओं की अनदेखी की गई है। इसी वजह से पूरे राज्य में पेसा कानून के विरोध के स्वर उठ रहे हैं। उनकी मांग है कि केंद्र सरकार द्वारा 1996 में बनाए गए पेसा कानून को सख्ती से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा का निर्णय सर्वोपरि होना चाहिए, जबकि राज्य सरकार के कानून में पारंपरिक ग्राम सभा को उपायुक्त के अधीन कर दिया गया है। जल, जंगल और जमीन पर संरक्षण का अधिकार ग्राम सभा का होना चाहिए और ग्राम सभा से ऊपर कोई समिति नहीं हो सकती। हर निर्णय ग्राम सभा और माझी खुद लेगा।

Spread the love

Related Posts

Potka : पोटका में पेयजल संकट गहराया, दर्जनों चापाकल खराब होने पर जेएलकेएम ने उठाई आवाज

जेएलकेएम नेता भागीरथ हांसदा ने डीसी को पत्र लिखकर विभागीय लापरवाही का लगाया आरोप पोटका : पोटका प्रखंड में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा…

Spread the love

Gua : विवेक कंस्ट्रक्शन के 43 कामगारों के वेतन विवाद पर श्रम विभाग में बनी सहमति

श्रम विभाग में हुई अहम वार्ता, 21 फरवरी 2026 तक भुगतान का निर्देश, श्रम-वार्ता रही सार्थक गुवा : टाटा स्टील से जुड़ी संवेदक कंपनी मेसर्स विवेक कंस्ट्रक्शन और उसके 43…

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *