Jamshedpur : आंगनवाड़ी कर्मियों को राज्यकर्मी का दर्जा दिए बिना झारखंड का विकास अधूरा – जेपी पांडेय

  • 2050 तक समृद्ध झारखंड के दावे पर उठे सवाल
  • कुपोषण और महिला कर्मियों की अनदेखी पर भाजपा नेता का तीखा प्रहार

जमशेदपुर : भाजपा किसान मोर्चा झारखंड प्रदेश के नेता एवं झारखंड राज्य समाज कल्याण आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ के संयोजक जय प्रकाश पांडेय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के उस बयान पर कड़ा सवाल उठाया है, जिसमें उन्होंने दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान झारखंड को वर्ष 2050 तक समृद्ध राज्य बनाने का दावा किया था। जे.पी. पांडेय ने कहा कि झारखंड निर्माण के लगभग 25 वर्षों बाद भी राज्य को न तो समृद्ध बनाया जा सका और न ही विकसित, ऐसे में अब 2050 का सपना किस आधार पर दिखाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक कुपोषण जैसी बुनियादी समस्या समाप्त नहीं होगी और मजबूत मानव संसाधन तैयार नहीं होगा, तब तक विकास की बातें केवल भाषण बनकर रह जाएंगी।

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2050 तक समृद्ध झारखंड का सपना या सियासी बयानबाज़ी?

जय प्रकाश पांडेय ने आरोप लगाया कि वर्तमान राजनीति महिलाओं को सशक्त बनाने या बच्चों को स्वस्थ भविष्य देने की नहीं, बल्कि केवल सम्मान राशि देकर वोट बटोरने तक सीमित हो गई है। उन्होंने कहा कि जिस राज्य की अधिकांश महिलाएं आज भी अशिक्षित हैं और जहां हजारों बच्चे कुपोषण का शिकार हैं, वहां विकास के दावे खोखले प्रतीत होते हैं। गांव-गांव में पिछले लगभग 50 वर्षों से कुपोषण दूर भगाने का काम कर रही आंगनवाड़ी सेविका और सहायिका स्वयं अनियमित और अल्प मानदेय पर काम कर रही हैं। कई बार उन्हें समय पर मानदेय तक नहीं मिलता, जिससे वे खुद कुपोषण और आर्थिक तंगी से जूझ रही हैं। ऐसे हालात में समृद्ध और शक्तिशाली झारखंड के निर्माण की कल्पना कैसे साकार होगी, यह बड़ा सवाल है।

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महिला सशक्तिकरण या केवल चुनावी रणनीति?

उन्होंने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि चाईबासा सहित कई सरकारी अस्पतालों में आज भी गर्भवती माताओं और बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने जैसी घटनाएं सामने आती हैं, जो मानव संसाधन निर्माण के दावों की पोल खोलती हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री महिलाओं को मिलने वाला राशन पिछले लगभग छह महीनों से बंद है। वहीं, सेविका और सहायिका को मिलने वाला मानदेय, मकान भाड़ा, मोबाइल रिचार्ज और पोषाहार की राशि भी महीनों से लंबित है। ऐसे हालात झारखंड को विकसित राज्य बनाने के दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।

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स्वास्थ्य और पोषण व्यवस्था पर सवालों के घेरे में सरकार

जय प्रकाश पांडेय ने सरकार से मांग की कि यदि वास्तव में झारखंड को विकसित और समृद्ध बनाना है तो आंगनवाड़ी सेविका और सहायिका को अविलंब राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए। उन्होंने सभी बकाया मानदेय के तत्काल भुगतान, सेवानिवृत्त सेविका को 10 लाख और सहायिका को 7 लाख रुपये की एकमुश्त राशि देने, सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार कम से कम 25 लाख रुपये ग्रेच्युटी देने और सेविका को 10 हजार तथा सहायिका को 7 हजार रुपये मासिक पेंशन देने की मांग की। उन्होंने कहा कि झारखंड खनिज और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, जरूरत केवल मानव संसाधन को कुपोषण मुक्त और सशक्त बनाने की है। इसके बिना 2050 तक समृद्ध झारखंड का सपना केवल “ख्याली पुलाव” ही साबित होगा।


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