रांची : राज्य की बिगड़ती आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सोमवार को रांची में दो पूर्व मुख्यमंत्रियों – मधु कोड़ा और बाबूलाल मरांडी (भाजपा प्रदेश अध्यक्ष) के बीच एक अनौपचारिक, लेकिन गंभीर बातचीत हुई. इस मुलाकात में झारखंड के समकालीन सामाजिक-आर्थिक हालात, किसानों, मजदूरों, युवाओं और विद्यार्थियों से जुड़ी समस्याओं पर व्यापक चर्चा हुई.
किसानों को नहीं मिल रहा फसल का मोल
पूर्व मुख्यमंत्रियों ने इस बात पर चिंता जताई कि झारखंड के किसान आज भी फसल का वाजिब मूल्य पाने से वंचित हैं. सिंचाई की अपर्याप्त व्यवस्था, फसल बीमा की अनदेखी और न्यूनतम समर्थन मूल्य की अनुपलब्धता के कारण प्रदेश में कृषि संकट लगातार गहराता जा रहा है. यह संकट केवल उत्पादन तक सीमित नहीं बल्कि किसान परिवारों के जीवन पर भी गहरा असर डाल रहा है.
मजदूरों का पलायन और सामाजिक असंतुलन
बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि राज्य में रोजगार के अवसर सीमित होने के कारण मजदूरों को दूसरे राज्यों की ओर पलायन करना पड़ रहा है. इससे न केवल परिवार बिखर रहे हैं, बल्कि झारखंड की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना भी प्रभावित हो रही है. स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की दिशा में ठोस पहल का अभाव चिंताजनक बताया गया.
शिक्षा व तकनीकी प्रशिक्षण की स्थिति चिंताजनक
मरांडी और कोड़ा ने युवाओं की शिक्षा को लेकर भी चिंता प्रकट की. उनका कहना था कि शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी से युवाओं का भविष्य संकट में है. तकनीकी शिक्षण संस्थान और कौशल विकास केंद्र संसाधनों के अभाव में प्रभावी साबित नहीं हो पा रहे हैं.
योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रशासनिक लापरवाही
दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही कई योजनाएं झारखंड में सही ढंग से लागू नहीं हो पा रही हैं. प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के चलते गरीबों और जरूरतमंदों तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच रहा है. योजनाओं की जमीनी निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया.
सांस्कृतिक हस्तक्षेप और सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति
बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों में बाहरी गतिविधियों और सांस्कृतिक हस्तक्षेपों को लेकर भी चिंता जताई गई. नेताओं का मानना था कि इन प्रवृत्तियों से राज्य की सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान को खतरा हो सकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
“झारखंड की आत्मा को बचाना ज़रूरी” – मधु कोड़ा
बैठक के बाद मधु कोड़ा ने कहा, “झारखंड की आत्मा उसकी परंपरा और प्रकृति में बसती है, जिसे बचाए रखकर ही राज्य का समावेशी और टिकाऊ विकास संभव है.” उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य सरकार को जनसंवाद बढ़ाकर और प्रशासन को ज़मीनी स्तर तक जवाबदेह बनाकर काम करना चाहिए.
इसे भी पढ़ें : Jharkhand: पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के लिए काम करने वाली यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा का जुड़ा झारखंड से लिंक, देखें Video
There is no ads to display, Please add some



















































