- भगवान राम के पदचिह्नों से जुड़ा पावन स्थल, श्रद्धालुओं के स्वागत को तैयार रामतीर्थ धाम
- वैतरणी तट पर महाआरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम का होगा आयोजन
गुवा : झारखंड-ओडिशा सीमा पर स्थित रामतीर्थ धाम इस बार भी मकर संक्रांति के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए सज-धज कर तैयार है। 14 जनवरी को आयोजित होने वाले इस धार्मिक मेले में लाखों श्रद्धालु सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां (झारखंड) तथा ओडिशा के केनझर, मयूरभंज और सुंदरगढ़ जिलों से पहुंचेंगे। सुबह वैतरणी नदी में पवित्र स्नान के बाद भक्त रामेश्वर शिव मंदिर सहित अन्य मंदिरों में पूजा-अर्चना करेंगे। संध्या समय वैतरणी तट पर भव्य गंगा आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा, जो मेले का प्रमुख आकर्षण रहेगा। झारखंड सरकार और जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित इस मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
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श्रद्धालुओं के लिए तैयार रामतीर्थ धाम और वैतरणी तट

नोवामुंडी क्षेत्र के चर्चित समाजसेवी एवं रामतीर्थ मंदिर विकास समिति के अधिशासी सदस्य निसार अहमद ने बताया कि मान्यता है कि भगवान राम ने वनवास के दौरान वैतरणी नदी तट पर विश्राम किया था। यहां उनके पदचिह्न और खड़ाऊं मिले थे तथा उन्होंने स्वयं शिवलिंग स्थापित किया था। इसी विश्वास से रामेश्वर शिव मंदिर की स्थापना हुई। भक्त यहां बेलपत्र, भांग और दूध चढ़ाते हैं। मकर संक्रांति के अलावा हर सोमवार, पूरे श्रावण मास, शिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर यहां पूजा-अर्चना होती रहती है। रामतीर्थ धाम में एक ही स्थान पर चार प्रमुख मंदिर स्थित हैं – रामेश्वर शिव मंदिर, सीताराम मंदिर, भगवान जगन्नाथ मंदिर और हनुमान मंदिर। ये सभी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।
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रामेश्वर शिव मंदिर और अन्य मंदिरों का महत्व
रामतीर्थ धाम में स्नान घाट, मंदिर तक सीढ़ियां, महिला स्नानघर, विश्राम के लिए चबूतरा और मंडप जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। मेले के दौरान प्रशासन पूरी मुस्तैदी से तैनात रहता है। हालांकि वैतरणी नदी की धारा तेज है और गहराई असमान है, जिससे कहीं-कहीं पानी में भंवर बन जाता है। इसलिए श्रद्धालुओं को केवल चिन्हित स्नान घाट पर ही स्नान करने की सलाह दी गई है। इस बार भी मकर संक्रांति के अवसर पर वैतरणी नदी तट पर संध्या महाआरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसकी देखरेख रामतीर्थ मंदिर कमिटी देवगांव और मेला डाक कमिटी नव युवक संघ को सौंपी गई है, ताकि कार्यक्रम शांति और सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।
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