काठमांडू: नेपाल सरकार द्वारा लगाए गए सोशल मीडिया बैन ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। फेसबुक, एक्स (पूर्व ट्विटर) और व्हाट्सऐप समेत 26 प्लेटफॉर्म पर रोक लगने के बाद भड़के प्रदर्शन इतने हिंसक हो गए कि हालात काबू से बाहर हो गए। दबाव बढ़ने पर सरकार को फैसला वापस लेना पड़ा और अंततः प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने पद से इस्तीफा दे दिया।
सोशल मीडिया बैन और हिंसा
तीन दिन पहले लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ राजधानी काठमांडू और कई जिलों में जबरदस्त विरोध शुरू हुआ। देखते ही देखते ये प्रदर्शन हिंसक हो गए। संसद भवन, राष्ट्रपति आवास और सुप्रीम कोर्ट में आगजनी हुई। कई मंत्रियों के घरों को भी प्रदर्शनकारियों ने निशाना बनाया। काठमांडू के हिल्टन होटल को भी आग के हवाले कर दिया गया।
मौतें, घायलों की भीड़
इन झड़पों में अब तक 23 लोगों की मौत और 300 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। हालात काबू में लाने के लिए काठमांडू, ललितपुर और भक्तापुर में कर्फ्यू लगा दिया गया है। सेना और पुलिस को तैनात कर गोलियां चलानी पड़ीं।
मंत्री का इस्तीफा और सेना का दबाव
कृषि एवं पशुपालन मंत्री रामनाथ अधिकारी ने सरकार के दमनकारी रवैये के खिलाफ इस्तीफा दे दिया। इसी बीच सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल ने साफ कहा कि अगर हालात सामान्य करने हैं तो प्रधानमंत्री को पद छोड़ना होगा। इसके बाद ओली ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को इस्तीफा सौंपा, जिसे स्वीकार कर लिया गया।
प्रदर्शनकारियों का रुख
‘Gen Z आंदोलन’ के नाम से चल रहे इस विरोध को युवाओं का समर्थन मिल रहा है। काठमांडू के मेयर बालेन शाह ने कहा – “आपके हत्यारे का इस्तीफा आ चुका है। अब संयम रखिए, यह पीढ़ी देश का नेतृत्व करेगी।” हालांकि प्रदर्शनकारी अभी भी सड़कों पर डटे हुए हैं और कई सरकारी भवनों पर कब्जा कर रहे हैं।
सुरक्षा अलर्ट और भारत की चिंता
त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बंद कर दिया गया है और भारत से जाने वाली इंडिगो की उड़ानें लखनऊ डायवर्ट करनी पड़ीं। भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी कर सुरक्षा बरतने की सलाह दी है।
नेपाल की राजनीति में नया दौर
ओली के इस्तीफे के साथ ही नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। अब नई सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सेना और राजनीतिक दलों के बीच बातचीत जारी है।
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