जमशेदपुर: सोनारी में टुसू पर्व के अवसर पर मुर्गा लड़ाई का विशेष आयोजन किया गया. इस परंपरा ने न केवल स्थानीय संस्कृति को जीवित रखा है, बल्कि इसे मनाने का एक अद्वितीय तरीका भी प्रदान किया है.
प्राकृतिक और सांस्कृतिक संरक्षण
टुसू मेले में मुर्गा लड़ाई की परंपरा, जिसे “मुर्गा पाड़ा” कहा जाता है, में दो मुर्गों की लड़ाई कराई जाती है. यह लड़ाई कभी-कभी जान से मारने तक की स्थिति में पहुँच जाती है. इस खेल में कुछ पुरस्कार और बाजी भी रखी जाती है, जिससे लोगों में और अधिक उत्साह बढ़ता है.
मस्ती और आनंद का मिलाजुला अनुभव
इस आयोजन में लोग मस्ती के साथ मुर्गा लड़ाई का आनंद लेते हुए नजर आते हैं. स्थानीय लोग बताते हैं कि यह परंपरा हमारे पूर्वजों से चली आ रही है और हम इसे आगे बढ़ा रहे हैं.
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