रांची: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला हरतालिका तीज का त्योहार आज नहाए-खाए के साथ शुरू हो गया। महिलाएं पूरे विधि-विधान से इस पर्व का शुभारंभ कर रही हैं। तीज व्रत मुख्य रूप से सुहागिन औरतें अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं।
नहाए-खाए की परंपरा
इस दिन महिलाएं सुबह स्नान कर शुद्ध होकर सात्विक भोजन करती हैं। माना जाता है कि इस दिन का भोजन अगले दिन निर्जला व्रत रखने की शक्ति और ऊर्जा देता है। नहाए-खाए के भोजन में कद्दू, दाल, चावल और घी का खास महत्व होता है।
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व्रत का महत्व
हरतालिका तीज व्रत को अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। तभी से यह व्रत सुहागिन और कन्याएं पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ करती हैं।
कल रखा जाएगा निर्जला उपवास
नहाए-खाए के अगले दिन यानी 26 अगस्त को महिलाएं निर्जला उपवास करेंगी। वे पूरे दिन भूखी-प्यासी रहकर शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना करेंगी। रात में भगवान शिव-पार्वती की कथा सुनने के बाद व्रत संपन्न होगा।
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