Bihar Elections: चिराग पासवान का फोन आउट ऑफ रीच, सीट बंटवारे पर भाजपा से ठनी

पटना:  बिहार की राजनीति में एक बार फिर चिराग पासवान सुर्खियों में हैं। पिछली विधानसभा चुनाव में उन्होंने नीतीश कुमार की रोशनी फीकी कर दी थी। अब एक बार फिर सीटों की लड़ाई में चिराग अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में हैं।

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा की ओर से दिए गए सीट ऑफर से चिराग संतुष्ट नहीं हैं। हालात ऐसे हैं कि इन दिनों उनका फोन भी भाजपा नेताओं के लिए “आउट ऑफ रीच” बताया जा रहा है — यानी संवाद की सारी लाइनें फिलहाल व्यस्त हैं।

भाजपा के बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान और प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े लगातार चिराग से संपर्क की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बात नहीं बन पा रही थी।
ऐसे में सियासी स्थिति संभालने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को हस्तक्षेप करना पड़ा। शाह के हस्तक्षेप के बाद अब माहौल कुछ शांत हुआ है और चिराग की ओर से संवाद के संकेत मिले हैं।

लोजपा (रामविलास) के प्रवक्ता धीरेंद्र मुन्ना ने कहा, “अभी सीट बंटवारे पर औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। भले ही फोन आउट ऑफ रीच हो, लेकिन हमारे नेता हमेशा पहुंच में हैं। चिराग पासवान पहले ही कह चुके हैं कि पार्टी सम्मानजनक हिस्सेदारी लेगी।”

सूत्रों के अनुसार, चिराग पासवान की मांग लगभग 40 सीटों की है। वे खास तौर पर गोविंदगंज, ब्रह्मपुर, अतरी, महुआ और सिमरी बख्तियारपुर जैसी सीटों पर जोर दे रहे हैं। इनमें से तीन सीटों पर जदयू भी दावा छोड़ने को तैयार नहीं है। इसी कारण लोजपा (रामविलास) ने घोषणा की है कि पार्टी 243 सीटों पर तैयारी कर रही है।

पिछले विधानसभा चुनाव में चिराग की पार्टी ने राजग से अलग होकर चुनाव लड़ा था, जिससे नीतीश कुमार को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
अब भाजपा नहीं चाहती कि वैसा हाल दोबारा हो। दिल्ली में हुई बिहार कोर कमेटी की बैठक में अमित शाह ने साफ कहा है कि 2020 जैसी गलती अब नहीं दोहराई जाएगी।

भाजपा जानती है कि चिराग पासवान का दलित और युवा वोट बैंक पर अच्छा प्रभाव है, इसलिए उन्हें नजरअंदाज करना राजनीतिक तौर पर जोखिम भरा हो सकता है। हालांकि भाजपा को लगता है कि बातचीत से स्थिति संभल जाएगी।

चिराग पासवान की महत्वाकांक्षा अब सिर्फ सीटों तक सीमित नहीं है। पटना की सड़कों पर उनके ‘अगला मुख्यमंत्री — चिराग पासवान’ वाले पोस्टर लग चुके हैं। भाजपा के सामने अब चुनौती दोहरी है — एक ओर जदयू खुद को बड़ा भाई बताने पर अड़ा है, तो दूसरी ओर चिराग, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा जैसे सहयोगी भी ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं।

राजग के भीतर सबसे कठिन समीकरण लोजपा (रामविलास) के साथ ही बन रहा है। हालांकि शाह के हस्तक्षेप के बाद उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन समाधान तक पहुंचने में समय लग सकता है।

 

 

इसे भी पढ़ें :  Patna : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 : तारिख का हुआ ऐलान, दो चरणों में होगा मतदान


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