- टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के फैसलों पर सवाल
- दो वर्षों से न्यूनतम मजदूरी को तरस रहे कंवाई चालक
- न्यूनतम मजदूरी की मांग पर अड़े कंवाई चालक
जमशेदपुर : टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन द्वारा ग्रेड रिवीजन की घोषणा की गई है, जिसके तहत सभी कर्मचारियों को ₹20,000 नगद दिए जाने की बात कही गई है। इसी क्रम में रविवार को हुडको डंप, टेल्को में टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन का सपरिवार पिकनिक भी हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। टाटा मोटर्स की उत्पादक गाड़ियों की बिक्री में बढ़ोतरी को लेकर इसे अच्छा समाचार बताया जा रहा है। लेकिन इन खुशियों के बीच उन मजदूरों की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं, जिनके श्रम से यह उपलब्धि संभव हुई। कंवाई चालक, जो गाड़ियों की आंतरिक ढुलाई में अहम भूमिका निभाते हैं, आज भी न्यूनतम मजदूरी की मांग को लेकर संघर्षरत हैं।
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उत्पादन बढ़ा, लेकिन श्रमिकों की परेशानी बरकरार
जानकारी के अनुसार कंवाई चालक 1 मार्च 2024 से टाटा मोटर्स के चेचिस यार्ड जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर धरने पर बैठे हैं और अब इस आंदोलन को लगभग दो वर्ष होने जा रहे हैं। आरोप है कि इस दौरान टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन का कोई भी प्रतिनिधि उनसे मिलने तक नहीं पहुंचा। जमशेदपुर ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड में यह सर्वविदित है कि कंवाई चालक लंबे समय से आंदोलनरत हैं, फिर भी कोई ठोस सुनवाई नहीं हो रही है। इतिहास गवाह है कि जब विभिन्न राजनीतिक दलों का कठिन समय था, तब भाजपा, झामुमो और कांग्रेस के कई नेता कंवाई चालकों की मांगों के समर्थन में खड़े थे। इनमें दीनानाथ पांडे, समरेश सिंह, अमर सिंह, हेमंत सोरेन, बन्ना गुप्ता और डॉ. अजय कुमार जैसे नाम शामिल हैं। आरोप है कि आज “अच्छे दिन” आने के बाद सभी ने कंवाई चालकों को भुला दिया है। चालकों की मांग है कि उनकी सच्चाई अखबारों में आए और “सबका साथ, सबका विकास” का नारा जमीन पर भी दिखे।
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