- मोबाइल और डिजिटल इंडिया में बढ़ते अपराधों को रोकने हेतु सख्त कानून और जागरूकता आवश्यक
- डिजिटल सुरक्षा और साइबर जागरूकता को बढ़ावा देना अनिवार्य
जमशेदपुर : भाजपा किसान मोर्चा के नेता और झारखंड राज्य आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ के संयोजक जय प्रकाश पांडेय ने महिलाओं और बच्चों पर बढ़ रहे डिजिटल हमलों पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग में मोबाइल और डिजिटल प्लेटफार्म का व्यापक उपयोग होने के बावजूद महिलाएं और बच्चे इन हमलों के सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई नवनिहाल बच्चों ने डिजिटल उत्पीड़न के कारण आत्महत्या की है, जबकि कई महिलाएं और लड़कियां ब्लैकमेल और भद्दे संदेशों की शिकार बनी हैं। डिजिटल हिंसा के रूप में ऑनलाइन हैरेसमेंट, हेट स्पीच, तस्वीरों से छेड़छाड़ और ब्लैकमेलिंग बढ़ रही है। पांडेय ने कहा कि 25 नवंबर से 16 दिसंबर तक संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) में इस मुद्दे पर चर्चा होगी, जिसमें वैश्विक मानवाधिकार संकट और डिजिटल हमलों पर रोकथाम के लिए कदम उठाने का निर्णय लिया जाएगा।
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डिजिटल युग में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर चिंताएं बढ़ीं
जय प्रकाश पांडेय ने बताया कि भारत में डिजिटल क्रांति जितनी तेजी से हुई, उतनी ही तेजी से महिलाएं और बच्चे डिजिटल अपराधों के शिकार बन रहे हैं। इसके चलते मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है और सामाजिक बदनामी की घटनाएं आम हो रही हैं। एआई का दुरुपयोग कर फर्जी वीडियो, एडिटेड कंटेंट और अश्लील सामग्री बनाकर महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाया जा रहा है। लगभग 85 प्रतिशत महिलाएं किसी न किसी रूप में ऑनलाइन हमलों का शिकार हैं, और उनके बैंक खातों से धन निकालने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। पांडेय ने चेताया कि टेक्नोलॉजी प्लेटफार्म पर कमजोर कानून और जिम्मेदारी की कमी डिजिटल अपराधियों को बढ़ावा दे रही है।
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ऑनलाइन उत्पीड़न और डिजिटल अपराधों से समाज में बढ़ती चिंता
उन्होंने कहा कि डिजिटल अपराधों को रोकने के लिए सख्त कानून बनाना, पुलिस और न्याय व्यवस्था को विशेष प्रशिक्षण देना और टेक्नोलॉजी कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना अनिवार्य है। पांडेय ने सुझाव दिया कि स्कूल और कॉलेज में छात्रों को डिजिटल नैतिकता और ऑनलाइन सुरक्षा पर आधारित पाठ्यक्रम से जोड़ना समय की आवश्यकता है। इसके अलावा जागरूकता अभियान तेज करना और स्वचालित सुरक्षा तंत्र विकसित करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि डिजिटल हिंसा का चेहरा बदल चुका है और इसके गंभीर प्रभाव को रोकने के लिए कठोर कानून और शिक्षा दोनों आवश्यक हैं।
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