- स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम् की भूमिका और राष्ट्रभक्ति की भावना को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की तैयारी
जमशेदपुर : भारतीय जनता पार्टी जमशेदपुर महानगर ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर इसे राष्ट्रीय उत्सव के रूप में भव्य रूप से मनाने जा रही है। शुक्रवार को साकची स्थित जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में महानगर अध्यक्ष सुधांशु ओझा ने विभिन्न कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि ‘वंदे मातरम्’ न केवल एक गीत है, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा और राष्ट्रवादी चेतना का स्वर रहा है। ओझा ने कहा कि आज की पीढ़ी को इस अमर राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व से परिचित कराना आवश्यक है। इस उद्देश्य से पार्टी शहर के विभिन्न क्षेत्रों, संस्थानों और सांस्कृतिक केंद्रों में अनेक कार्यक्रम आयोजित करेगी।
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सुधांशु ओझा ने बताया कि 15 नवंबर को धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर साकची स्थित उनकी आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण किया जाएगा। इसके पश्चात 150 से अधिक नागरिकों एवं वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का पूर्ण स्वर में गायन होगा। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आदिवासी स्वाभिमान, स्वतंत्रता संघर्ष और राष्ट्रभावना के संकल्प का प्रतीक होगा। इस अवसर पर युवा मोर्चा तथा महिला मोर्चा की सक्रिय भूमिका रहेगी, साथ ही शहर के साहित्यकारों और शिक्षाविदों को भी आमंत्रित किया जाएगा।
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सुधांशु ओझा ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ वर्ष 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित एक ऐसी अमर कृति है, जिसने अंग्रेजी शासन के खिलाफ पूरे देश को एक सूत्र में बाँध दिया। 1896 में रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा कांग्रेस अधिवेशन में इसका प्रथम गायन होने के बाद यह राष्ट्रवाद का उद्घोष बन गया। इसका सामूहिक गायन सुनकर अंग्रेज शासन भयभीत हो गया और इस गीत के उच्चारण तक पर प्रतिबंध लगा दिया गया। यह गीत स्वदेशी आंदोलन और क्रांतिकारी गतिविधियों की चेतना का प्रमुख आधार बना, जिसने बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, सुभाषचंद्र बोस और भगत सिंह जैसे नेताओं के मन में आज़ादी का ज्वालामुखी प्रज्वलित किया।
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प्रेस वार्ता में सुधांशु ओझा ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि 1923 के काकीनाडा अधिवेशन में कांग्रेस अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद अली ने धार्मिक आधार पर ‘वंदे मातरम्’ के गायन पर आपत्ति जताकर राष्ट्रगीत के सम्मान को ठेस पहुँचाई। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने कई बार मंचों पर राष्ट्रगीत के प्रति असहिष्णुता का परिचय दिया है। 1937 में मुस्लिम लीग को खुश करने के लिए कांग्रेस कार्यसमिति ने वंदे मातरम् को बदलने का प्रस्ताव रखा। यहां तक कि 2019 में मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने सचिवालय में वंदे मातरम् के गायन पर प्रतिबंध तक लगा दिया था।
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ओझा ने बताया कि आगामी दिनों में भाजपा जिला कार्यालय में ‘वंदे मातरम् @150’ विषय पर एक विशेष प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी, जिसमें ‘आनंदमठ’ उपन्यास और राष्ट्रगीत के साहित्यिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहलुओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में निबंध लेखन, चित्रकला, भाषण और सामूहिक गायन प्रतियोगिताएँ आयोजित होंगी, ताकि नई पीढ़ी राष्ट्रभक्ति की भावना को समझ सके और भारत की स्वतंत्रता यात्रा पर गर्व कर सके। भाजपा जमशेदपुर महानगर की ओर से इन कार्यक्रमों की तैयारी जोर-शोर से जारी है।