गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर भारत के राष्ट्रगान के लिए प्रेरणास्रोत रहे : संजय बनर्जी
गुवा : गुवा के विवेक नगर स्थित दुर्गा मंडप प्रांगण में सहचरी ग्रुप की महिलाओं द्वारा गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर बच्चों एवं महिलाओं ने गुरुदेव के गीत प्रस्तुत कर तथा मनमोहक नृत्य कर उपस्थित लोगों का दिल जीत लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया। सहचरी ग्रुप की महिलाओं एवं अतिथियों ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम की शुरुआत की।
इस दौरान अध्यक्ष दीपा राय चौधरी ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जन्म 7 मई 1861 को हुआ था, लेकिन पश्चिम बंगाल में पारंपरिक रूप से उनकी जयंती 25 वैशाख को मनाई जाती है। उन्होंने बताया कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर वर्ष 1913 में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले एशियाई थे तथा उन्होंने भारतीय राष्ट्रगान “जन गण मन” की रचना की थी।
कार्यक्रम में छोटे-छोटे बच्चों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम ने सभी का मन मोह लिया। गीत, संगीत एवं नृत्य की प्रस्तुतियों को दर्शकों ने खूब सराहा। कार्यक्रम के अंत में सहचरी ग्रुप की महिलाओं ने भाग लेने वाले बच्चों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया। इसके बाद सभी लोगों के लिए सामूहिक भोजन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन गुवा सेल के महाप्रबंधक संजय बनर्जी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सहचरी ग्रुप की अध्यक्ष दीपा राय चौधरी ने किया।
महाप्रबंधक संजय बनर्जी ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 1861 में कोलकाता में हुआ था। वे एक महान कवि, दार्शनिक और कलाकार थे। उन्हें 1913 में “गीतांजलि” के लिए नोबेल पुरस्कार मिला। टैगोर ने शांतिनिकेतन की स्थापना की, जो एक अनूठा शिक्षण केंद्र है, और भारत के राष्ट्रगान के लिए प्रेरणास्रोत रहे। उन्होंने व्यापक रूप से लेखन किया।
इस मौके पर दीपा राय चौधरी, गोपा राय चौधरी, सुष्मिता बोस, सोनाली कांजीलाल, शुभ्रा दत्ता, डॉ. पोलोमी सेन गुप्ता,रुमा घोष,शिवली विस्वास,पूजा घोष,सोनाली चौबे,सुजाता दास,अरीमा घोष,उमा चक्रवर्ती, श्रेया घोष, सुजाता बनर्जी, सुमन कुमार सहित अन्य महिलाएं उपस्थित थे।
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