Jadugora : जन्म के समय देर से रोने अथवा आवाज निकालने वाले शिशू को हो सकता है मिर्गी : डॉ ममता भूषण सिंह

परियोजना उल्लास के तहत केंदाडीह सीएचसी में एम्स से आए चिकित्सकों ने मिर्गी मरीजों की काउंसलिंग की व दवाईयां बांटी

जादूगोड़ा : दिल्ली के एम्स अस्पताल से आई डॉक्टरों को टीम शुक्रवार को मुसावनी प्रखंड अंतर्गत केंदाडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ( जादूगोड़ा) पहुंची। परियोजना उल्लास के तहत टीम ने मिर्गी मरीजों की पहले काउंसलिंग की। तत्पश्चात उनकी स्क्रीनिंग कर दवाईयां दी गई। कार्यक्रम में केंद्र के प्रभारी सुंदर लाल मार्डी व बीपीएम सूरज पूर्ति भी मौजूद रहे। डॉ. सुंदर लाल मार्डी ने कहा कि झारखंड सरकार के पहल पर दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ ममता भूषण सिंह के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम यहां पहुंची है। चिकित्सकों की टीम ने 80 मिर्गी रोगियों की बारीकी से स्वास्थ्य संबंधित जानकारियों हासिल कर उन्हें दवाइयां मुहैया कराई। वहीं डॉ. ममता भूषण सिंह ने कहा कि झारखंड में मिर्गी रोगी के इलाज की समुचित सुविधा नहीं है। जिसकी वजह से इस बीमारी के रोगियों की संख्या दिनो-दिन बढ़ रही है।

शिविर में आए रोगियों की जांच करते चिकित्सक

उन्होंने कहा कि यह बीमारी पूरे देश में पाई जाती है। जिसमें यह वंशानुगत भी होती है, पीढ़ी दर पीढ़ी चलती है। डॉ. ममता भूषण सिंह ने बताया कि जन्म के समय अगर नवजात के देरी से आवाज निकालने या रोने के लक्षण दिखते हैं तो, उस नवजात में आगे चलकर मिर्गी के लक्षण पाए जाते जा सकते हैं। इसके अलावे पूर्व में सिर पर चोट लगना या गांठ की वजह से भी पीड़ित व्यक्ति मिर्गी रोग का लोग शिकार हो सकता है। इसका प्रमुख लक्ष्ण पीड़ित मरीज का शरीर अचानक ऐंठने होने लगता है। इस बीमारी पर नियंत्रण दवा के डोज से ही संभव है। अंत में उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी, स्वास्थ्य वर्कर व डॉक्टर की रुचि के बैगर इस बीमारी की रोकथाम संभव नहीं है।

कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला कार्यक्रम समन्वय हकिम प्रधान, सूरज पूर्ति (बीपीएम केंदाडीह अस्पताल) कार्यक्रम के नोडल अधिकारी  डॉ आर के पांडा, दीपक गिरी (सदर अस्पताल) डॉ महेश हेंब्रम, डॉ  सुकांतो सीट (पोटका), जितेंद सिंहदेव, सुशीला टूटू, समेत एमपीडब्लू, व सहियाओं ने अहम भूमिका निभाई।

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