कोलकाता : दक्षिण पूर्व रेलवे (दपूरे) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में स्क्रैप निपटान के क्षेत्र में ऐतिहासिक सफलता हासिल करते हुए 148.54 करोड़ की रिकॉर्ड स्क्रैप बिक्री दर्ज की है। यह किसी भी वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में दपूरे द्वारा अब तक की सबसे बड़ी स्क्रैप बिक्री है। इस उपलब्धि के साथ दक्षिण पूर्व रेलवे ने देश के 18 जोनल रेलवे में स्क्रैप बिक्री राजस्व के मामले में दूसरा स्थान प्राप्त कर अपनी कार्यकुशलता और प्रबंधन क्षमता का शानदार परिचय दिया है।
दपूरे की यह उपलब्धि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 21.24 प्रतिशत अधिक है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष के प्रथम तिमाही के अनुपातिक लक्ष्य से 65.04 प्रतिशत ज्यादा रही। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह सफलता न केवल राजस्व वृद्धि का संकेत है, बल्कि रेलवे परिसरों को स्वच्छ, व्यवस्थित और आधुनिक बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
स्क्रैप निपटान अभियान को केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन से जोड़ते हुए रेलवे प्रशासन ने इसे विशेष प्राथमिकता दी है। इससे रेलवे परिसरों में वर्षों से जमा अनुपयोगी सामग्री हटाई जा रही है, जिससे स्वच्छता के साथ-साथ मूल्यवान परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित हो रहा है।
इस उल्लेखनीय उपलब्धि का श्रेय दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक ए. के. जैन के दूरदर्शी नेतृत्व को दिया जा रहा है। उन्होंने अक्टूबर 2026 तक “जीरो स्क्रैप मिशन” पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उनके सतत मार्गदर्शन, नियमित मॉनिटरिंग और विभागीय समन्वय के चलते पुराने एवं अनुपयोगी सामग्रियों की पहचान, सूचीकरण और त्वरित निपटान की प्रक्रिया में तेजी आई है। पहली तिमाही के दौरान दक्षिण पूर्व रेलवे ने कुल 22,398 मीट्रिक टन फेरस स्क्रैप, 440 मीट्रिक टन नॉन-फेरस स्क्रैप, 42 पुराने कोच, 306 वैगन तथा 2,963 मीट्रिक टन अन्य विविध सामग्री का सफलतापूर्वक निपटान किया।
दपूरे के स्टोर्स विभाग ने “जीरो स्क्रैप मिशन” के तहत पूरे जोन में विशेष अभियान चलाकर सेक्शन, डिपो, वर्कशॉप, शेड और अन्य रेलवे परिसरों में जमा स्क्रैप की पहचान और सफाई का कार्य तेज किया है। इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया, जिससे स्क्रैप निपटान अभियान को नई गति मिली।
रेलवे प्रशासन का कहना है कि आने वाले महीनों में भी इस अभियान को और तेज किया जाएगा, ताकि रेलवे परिसरों की स्वच्छता, परिचालन दक्षता और राजस्व वृद्धि को नई मजबूती मिल सके। दक्षिण पूर्व रेलवे की यह उपलब्धि भारतीय रेल के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी है।
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