- हल्दीपोखर में श्रीमद् भागवत कथा का भव्य समापन, भक्ति और ज्ञान का संगम
- गणतंत्र दिवस के शुभ मुहूर्त में कथा का समापन, भक्ति भाव से सराबोर रहे श्रद्धालु
पोटका : पोटका प्रखंड के हल्दीपोखर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का समापन सोमवार को भव्य और भावपूर्ण वातावरण में हुआ। अंतिम दिन व्यास पंडित उमाशंकर शुक्ल महाराज ने गणतंत्र दिवस के शुभ मुहूर्त में भागवत की आरती एवं मंगलाचरण के साथ कथा का विधिवत समापन किया। इस अवसर पर देश के अमर शहीदों को नमन करते हुए देशभक्ति भजनों की प्रस्तुति दी गई, जिससे पूरा पंडाल राष्ट्रभक्ति और श्रद्धा से गूंज उठा। महाराज ने राजा परीक्षित की कथा को पूर्ण करते हुए सुखदेव महाराज की विदाई के साथ कथा प्रसंग को विराम दिया। अंतिम दिन का आयोजन भक्ति, ज्ञान और आस्था की पराकाष्ठा का प्रतीक रहा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा रस का आनंद लिया।
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कृष्ण-सुदामा प्रसंग से मिला समाज को संदेश, चंपई सोरेन ने लिया आशीर्वाद
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कथावाचक पंडित उमाशंकर शुक्ल महाराज ने अंतिम दिन श्रीकृष्ण के गृहस्थ जीवन, स्यामंतक मणि की कथा, सुदामा चरित्र, चौबीस गुरुओं की कथा तथा राजा परीक्षित को मोक्ष प्राप्ति का भावपूर्ण वर्णन किया। कृष्ण-सुदामा प्रसंग पर उन्होंने कहा कि सच्ची मित्रता में अमीरी-गरीबी का कोई भेद नहीं होता। भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा का सम्मान कर यह संदेश दिया कि प्रेम, आदर और विनम्रता धन-दौलत से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। राजा परीक्षित की मुक्ति कथा के माध्यम से महाराज ने बताया कि जीवन क्षणभंगुर है, इसलिए समय रहते ईश्वर भक्ति, सत्संग और श्रीमद् भागवत के श्रवण से ही सांसारिक दुखों से मुक्ति संभव है। कार्यक्रम में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने व्यास पीठ से आशीर्वाद लेते हुए कहा कि भागवत सनातन धर्म की कुंजी है और इसमें निहित संदेशों को जीवन में उतारने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य नश्वर है, लेकिन उसके कर्म और कृतियां सदैव जीवित रहती हैं। कथा समिति ने मंगलवार को हवन व भंडारा में सभी श्रद्धालुओं से शामिल होने की अपील की है।