सिल्ली: सोहराय पर्व के अवसर पर किता गाँव में बुधवार को पारंपरिक ‘बरद भिड़का’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पूरे गाँव ने मिलकर इस सांस्कृतिक परंपरा को उत्साह और एकजुटता के साथ मनाया।
कार्यक्रम के दौरान गाँव के विभिन्न स्थानों पर ‘खंटा’ (लकड़ी का खंभा) गाड़कर उसमें बैलों को मोटी रस्सियों से बाँधा गया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर बैलों को नचाया गया, जिसे देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। यह परंपरा गाँव में पीढ़ियों से चली आ रही है और सोहराय पर्व का अहम हिस्सा मानी जाती है।
गाँव की महिलाओं ने पहले खंटा की विधिवत पूजा-अर्चना की, जिसके बाद ‘बरद भिड़का’ कार्यक्रम शुरू हुआ। आयोजन में गीत और नृत्य का दौर चलता रहा। गीत गाने और नचाने वालों में दशरथ महतो, रामपदो, परमेश्वर, रूपेश, बिरेन, गंगाधर, चंद्रमोहन, जितेंद्र और सुधीर मिर्धा शामिल थे। कार्यक्रम की व्यवस्था में रंजीत महतो, बिमल, विकास, सुजीत, जयंत, बंशीधर, उपेंद्र, जगन्नाथ, कमलेश, कैलाश और रतन कुमार ने सक्रिय भूमिका निभाई।
पूरा गाँव इस मौके पर एक साथ शामिल हुआ। महिलाएँ, पुरुष और बच्चे सभी ने मिलकर पर्व का आनंद लिया। कार्यक्रम की जानकारी चंडी प्रसाद महतो ने दी।
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