पटमदा: बरसात के मौसम के साथ ही डायरिया तेजी से फैलने लगा है। इसका ताजा उदाहरण पटमदा प्रखंड के धूसरा गांव में देखने को मिला। आदिवासी सबरों का यह गांव पूरी तरह डायरिया की चपेट में है। लगभग हर घर में कोई न कोई बीमार है। मंगलवार को कई मरीजों की हालत गंभीर होने पर आठ लोगों को एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में उनका इलाज चल रहा है।
गांव की सुमन सबर ने बताया कि उनके परिवार के चार सदस्य बीमार हैं। ग्रामीणों के अनुसार पूरे गांव में एक भी चापाकल नहीं है। मजबूरी में लोग कुंए का पानी पीते हैं, जो बरसात में भर जाने पर कीड़े-मकौड़े से संक्रमित हो जाता है। यही कारण है कि डायरिया तेजी से फैल रही है। चिंताजनक बात यह है कि अब तक न तो स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची है और न ही प्रशासनिक स्तर पर कोई पहल हुई है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है।

एमजीएम अस्पताल में इलाज कर रहे चिकित्सकों ने बताया कि पटमदा से आए सभी मरीज डायरिया से पीड़ित हैं। पूछताछ में मरीजों ने बताया कि वे कुंए के खुले पानी पर निर्भर हैं। डॉक्टरों का मानना है कि दूषित पानी ही बीमारी का मुख्य कारण है। विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात के दिनों में गंदा पानी और मच्छर-मक्खियां संक्रमण फैलाते हैं। दूषित भोजन और पानी से डायरिया तेजी से फैलता है।
एमजीएम अस्पताल के शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि रोजाना करीब आधा दर्जन बच्चे डायरिया के कारण अस्पताल पहुंच रहे हैं। मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. बलराम झा के अनुसार, उनके ओपीडी में भी रोजाना आधा दर्जन मरीज आते हैं, जिनमें कई को भर्ती करना पड़ता है।
डॉ. रविंद्र कुमार ने कहा कि साफ और उबला हुआ पानी पीना, खाने-पीने की वस्तुओं को ढककर रखना और स्वच्छता बनाए रखना ही डायरिया से बचाव का सबसे आसान तरीका है। बरसात के मौसम में विशेष सतर्कता जरूरी है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग है कि जल्द से जल्द गांव में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जाए, ताकि डायरिया जैसी बीमारियों पर रोक लग सके।
There is no ads to display, Please add some


















































