गुवा: आगामी 15 नवंबर को होने वाले 150वें बिरसा मुंडा जयंती और 25वें झारखंड स्थापना दिवस को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इसी क्रम में आदिवासी कल्याण केंद्र, मेघाहातुबुरू परिसर में विभिन्न सामाजिक संगठनों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष बीर सिंह मुंडा ने की। बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा, आवश्यक सामग्रियों का प्रबंधन और आयोजन समिति गठन के बारे में चर्चा हुई। महासचिव रोया राम चाम्पिया ने बताया कि 13 नवंबर को एक विशेष आयोजन समिति का गठन किया जाएगा, जो कार्यक्रम का संचालन करेगी।
अध्यक्ष बीर सिंह मुंडा ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान बिरसा मुंडा आदिवासी नेता और स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया और 19वीं सदी के अंत में ‘उलगुलान’ आंदोलन चलाया। उन्होंने सभी संगठनों से अपील की कि इस वर्ष बिरसा जयंती और झारखंड स्थापना दिवस को हर्षोल्लास, परंपरा और सांस्कृतिक गौरव के साथ मनाया जाए।
![]()
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सांस्कृतिक कार्यक्रम, पारंपरिक नृत्य और स्थानीय कलाकारों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। आयोजन के दौरान जनजागरण अभियान चलाया जाएगा ताकि लोगों को आदिवासी इतिहास और झारखंड की सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ा जा सके।
उपस्थित संगठनों में शामिल थे:
आदिवासी कल्याण केंद्र किरीबुरू
आदिवासी कल्याण केंद्र प्रॉस्पेक्टिंग
मुंडा समाज किरीबुरू-मेघाहातुबुरू
आदिवासी हो समाज युवा महासभा
मुख्य उपस्थित गणमान्य लोग: अमर सिंह सुंडी, धनुर्जय लागुरी, सरगिया अंगरिया, जगन्नाथ चातर, एस.आर. चातर, वीर सिंह मुंडा, बुधुआ कोनगड़ी, हीरालाल सुंडी, जोन पुरती, महेंद्र आल्डा, जुनेश केराई, मुकुल गोप, सोमा नाग, माधव चन्द्र कोड़ा, महेंद्र सिंह गिलुआ, सुनिल सिंकु, मिथलेश हेंब्रोम, गोपी लागुरी, दामु सोय, मनोज लागुरी, श्याम बिरुवा, अशाई चाम्पिया, बिलाची सुंडी, पलो सोय, उम्लेन हेस्सा, जयराम पिंगुआ।
बैठक में किरीबुरू लौह अयस्क खदान प्रबंधन और भगवान बिरसा मुंडा स्मारक स्थल की रख-रखाव एवं सौंदर्यीकरण पर भी जोर दिया गया। स्थानीय लोगों ने अपील की कि स्मारक स्थल और खदान क्षेत्र को पर्यटन के रूप में विकसित किया जाए ताकि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र बन सके।