- विधायक सरयू राय का गैर सरकारी प्रयास, जीवाश्म संरक्षण को मिलेगी कानूनी मजबूती
- राजमहल की पहाड़ियों में खतरे में जीवाश्म धरोहर
जमशेदपुर : जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने झारखंड भू-विरासत (जीवाश्म) विधेयक का प्रारूप बुधवार को झारखंड के राज्यपाल को सौंपा। यह विधेयक आगामी विधानसभा बजट सत्र-2026 में एक गैर सरकारी धन विधेयक के रूप में प्रस्तुत किया जाना प्रस्तावित है। सरयू राय ने बताया कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार किसी भी धन विधेयक को विधानसभा में पेश करने से पूर्व राज्यपाल की स्वीकृति आवश्यक होती है। इसी क्रम में उन्होंने राज्यपाल से विधेयक को पेश करने की अनुमति देने का अनुरोध किया। राज्यपाल ने आश्वासन दिया कि वे इस विधेयक के प्रारूप को अपनी अनुशंसा के साथ राज्य सरकार को भेजेंगे और जब यह विधेयक सरकार व विधानसभा के माध्यम से विधिवत उनके समक्ष आएगा, तो वे इसे शीघ्र मंजूरी प्रदान करेंगे। सरयू राय ने इसे झारखंड के लिए एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह विधेयक राज्य की भू-विरासत को संरक्षित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
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बजट सत्र 2026 में अहम विधेयकों की तैयारी
गौरतलब है कि सरयू राय ने इससे पूर्व मंगलवार को इस विधेयक का प्रारूप विधानसभा अध्यक्ष को भी सौंपा था और उन्हें आगामी बजट सत्र में इसे सदन के समक्ष प्रस्तुत करने की सूचना दी थी। सरयू राय के अनुसार, राजमहल की पहाड़ियों, विशेषकर साहेबगंज और पाकुड़ जिलों में बड़ी संख्या में काष्ठ जीवाश्म पाए जाते हैं, जो खनन और अन्य मानवीय गतिविधियों के कारण तेजी से नष्ट हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये जीवाश्म केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश की अमूल्य राष्ट्रीय धरोहर हैं, जिनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए एक स्पष्ट अधिनियम और नियमावली का निर्माण जरूरी है, ताकि जीवाश्मों के संरक्षण, प्रबंधन और अवैध दोहन पर रोक लगाई जा सके। यह विधेयक प्राकृतिक विरासत को बचाने के साथ-साथ भावी पीढ़ियों के लिए वैज्ञानिक और सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।