जमशेदपुर : आज का दिन भारत के इतिहास में अत्यंत गौरवपूर्ण और प्रेरणादायक है। 26 जनवरी 1950 को हमारा संविधान लागू हुआ और भारत एक सम्पूर्ण प्रभुत्वसंपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य बना। यद्यपि संविधान लागू हुए 76 वर्ष पूरे हो चुके हैं, फिर भी प्रथम गणतंत्र दिवस को सम्मिलित करने के कारण आज हम 77वाँ गणतंत्र दिवस मना रहे हैं।
यह दिन केवल उत्सव का नहीं, बल्कि संविधान के प्रति प्रतिबद्धता और लोकतांत्रिक मूल्यों के आत्मचिंतन का भी दिन है। हमारा संविधान लगभग तीन वर्षों के गहन मंथन के बाद तैयार हुआ। इस महान कार्य का नेतृत्व भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर ने किया। उन्होंने एक ऐसा संविधान दिया जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित है। यही मूल्य आज भी भारत की आत्मा हैं।
आज गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर 30 भव्य झाँकियाँ निकल रही हैं, जिनमें 17 राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश तथा 13 केंद्रीय मंत्रालय एवं सेवाएँ शामिल हैं। ये झाँकियाँ भारत की सांस्कृतिक विविधता, राष्ट्रीय विरासत और विकास यात्रा को दर्शाती हैं। यह दृश्य हमें याद दिलाता है कि भारत एकता में विविधता का जीवंत उदाहरण है।
एक अधिवक्ता होने के नाते मैं विशेष रूप से यह कहना चाहता हूँ कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि यह नागरिकों के अधिकारों की ढाल और कर्तव्यों की दिशा है। जब तक संविधान सुरक्षित है, तब तक लोकतंत्र सुरक्षित है।
आज हमें यह संकल्प लेना होगा कि—हम संविधान का सम्मान करेंगे,कानून के शासन को मज़बूत करेंगे और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करेंगे।
देश की प्रगति केवल सरकार से नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों से होती है। जब प्रत्येक नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को समझेगा, तभी भारत सच्चे अर्थों में विश्वगुरु बनेगा।
अंत में, मैं उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करता हूँ जिनके बलिदान से हमें यह आज़ादी मिली, और उन संविधान निर्माताओं को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ जिन्होंने हमें यह महान संविधान दिया।
आइए, इस 77वें गणतंत्र दिवस पर हम सब मिलकर यह प्रण लें कि—हम संविधान की गरिमा बनाए रखेंगे,लोकतंत्र को सशक्त करेंगेऔर भारत को प्रगति के शिखर पर पहुंचाएंगे।
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