जमशेदपुर: धालभूमगढ़ थाना क्षेत्र में थाना प्रभारी द्वारा महिला आरक्षी से हुई छेड़खानी मामले में भाजपा नेता अंकित आनंद का गुस्सा फूटा है. उन्होंने प्रशासन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि महिला आरक्षी की अस्मिता दांव पर है और जिम्मेदार अधिकारी ‘भीष्म पितामह’ बने मौन साधे बैठे हैं। ऐसे मामलों में चुप्पी पुलिस विभाग की साख पर गंभीर दाग छोड़ती है।
उन्होने पुलिस प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा है कि शिकायत दर्ज हुए दो सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, इसके बावजूद अब तक आरोपी थाना प्रभारी पवन कुमार को मात्र निलंबित किया गया है उन्होंने अब FIR DGP से मामले में अब तक FIR दर्ज नहीं करने का कारण पूछा है. उन्होने प्रशासन पर कार्रवाई के नाम पर केवल विभागीय औपचारिकता पूरी कर मामले को ठंडे बस्ते में डालने का गंभीर आरोप भी लगाया.
अंकित आनंद ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा — क्या झारखंड में पुलिसकर्मियों और आम जनता के लिए अलग-अलग कानून हैं? आम नागरिक पर मामूली आरोप में भी तत्काल FIR दर्ज होती है, लेकिन जब छेड़खानी का आरोपी खुद पुलिस अधिकारी होता है तो उसे सिर्फ निलंबित कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है। यह कानून की अवमानना और पद का दुरूपयोग नहीं तो और क्या है?
उन्होंने झारखंड पुलिस के डीजीपी से सवाल किया कि जब मामला महिला आरक्षी की अस्मिता से जुड़ा है, तब अब तक एफआईआर क्यों नहीं हुई? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि एसएसपी पीयूष पांडेय की कृपा का कारण क्या है, जिसके चलते छेड़खानी के आरोपी थाना प्रभारी पर अब तक कोई FIR या कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।
भाजपा नेता ने कहा कि यह प्रकरण घाटशिला विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहाँ इस समय उपचुनाव को लेकर आचार संहिता लागू है। ऐसे में धालभूमगढ़ थाना प्रभारी के निलंबन के बाद वहां प्रशासनिक रिक्तता बनी हुई है।
अंकित आनंद ने राज्य एवं जिले के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से वे मामले पर स्वतः संज्ञान लेने अपील की है. साथ ही क्षेत्र में नए थाना प्रभारी की नियुक्ति की मांग भी की है.
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