Jamshedpur : झारखंड में 11,700 करोड़ के विकास कार्य ठप, सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल – जय प्रकाश पांडेय

  • भुगतान संकट, पंचायतों का आंदोलन और केंद्रीय राशि का हिसाब न देना बना बड़ा मुद्दा
  • केंद्रीय राशि के ऑडिट पर सरकार की चुप्पी से बढ़ी मुश्किलें
  • ऑडिट रिपोर्ट के अभाव में रुकी केंद्रीय योजनाओं की रफ्तार
  • आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

जमशेदपुर : भाजपा किसान मोर्चा झारखंड प्रदेश के नेता और झारखंड राज्य आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ के संयोजक जय प्रकाश पांडेय ने राज्य की हेमंत सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि झारखंड में विकास कार्य लगभग ठप हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण कार्य विभाग, पेयजल विकास विभाग और स्वच्छता विभाग के अंतर्गत लगभग 11,700 करोड़ रुपये के कार्यों का भुगतान अब तक ठेकेदारों को नहीं किया गया है। यह स्थिति राज्य सरकार की बिगड़ती वित्तीय और प्रशासनिक हालत को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि नगर निगम चुनाव का लंबे समय तक न होना और पंचायतों को विकास कार्यों के लिए राशि नहीं मिलना सरकार की विफलता को दर्शाता है, जिसके कारण पंचायत स्तर पर आंदोलन की स्थिति बन गई है।

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भुगतान नहीं होने से ठेकेदार और पंचायतें आंदोलन को मजबूर

जय प्रकाश पांडेय ने कहा कि राज्य सरकार बजट पास तो कर रही है, लेकिन खर्च का सही हिसाब केंद्र सरकार को नहीं दे पा रही है। केंद्र से मिली विकास राशि का ऑडिट रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत नहीं करने के कारण अगली किस्तें रुक रही हैं। इसके बावजूद राज्य सरकार केंद्र पर आरोप लगाकर केवल शोर मचाती रहती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब तक खर्च का लेखा-जोखा नहीं दिया जाएगा, तब तक केंद्र सरकार नई राशि कैसे जारी करेगी। इस स्थिति के कारण झारखंड के कई महत्वपूर्ण विकास कार्य बाधित हो रहे हैं और आम जनता में सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

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आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य व्यवस्था में गंभीर अनियमितताओं का आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि सामाजिक कल्याण और स्वास्थ्य जैसे अहम विभागों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आंगनवाड़ी केंद्रों में अव्यवस्था बनी हुई है और स्वास्थ्य क्षेत्र में झोलाछाप इलाज से स्थिति चिंताजनक है। जय प्रकाश पांडेय ने कहा कि झारखंड बनने के बाद से ही आंगनवाड़ी सेविका और सहायिकाओं का शोषण हो रहा है। लगभग 75 हजार महिलाएं दशकों से मानदेय पर काम कर कुपोषण दूर करने में जुटी हैं, लेकिन उन्हें अब तक राज्यकर्मी का दर्जा नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि नई योजनाओं के जरिए केवल वोट साधने का प्रयास हो रहा है। अंत में उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि राज्य सरकार से विकास और जनहित के कार्यों का पूरा हिसाब लिया जाए।

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