Bihar जदयू के प्रभावशाली नेता हर्षित कुमार साइबर ठगी में गिरफ्तार, 7 करोड़, 1500 सिम कार्ड और लैपटॉप बरामद

सुपौल : बिहार के सुपौल जिले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने एक सनसनीखेज कार्रवाई करते हुए सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के युवा प्रदेश सचिव हर्षित कुमार को गिरफ्तार किया है। हर्षित के घर से 1500 सिम कार्ड, कई लैपटॉप, सिम बॉक्स डिवाइस और संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए हैं। उनके बैंक खाते में सात करोड़ रुपये से अधिक की राशि होने की बात सामने आई है। इस मामले ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे बिहार में हलचल मचा दी है, क्योंकि हर्षित एक प्रभावशाली नेता के रूप में जाने जाते थे।

पटना से आई EOU की विशेष टीम ने सुपौल के करजाइन थाना क्षेत्र के गोसपुर गांव में शनिवार शाम 4 बजे से रविवार सुबह 8 बजे तक करीब 16 घंटे की लंबी छापेमारी की। इस दौरान सुपौल के पुलिस अधीक्षक (SP) शरथ आरएस भी मौजूद रहे। छापेमारी में EOU को साइबर ठगी से जुड़े कई अहम सबूत मिले, जिनमें 8 सिम बॉक्स डिवाइस, सैकड़ों सिम कार्ड (प्रमाणित, उपयोग किए गए और अनुपयोगी), कई बैंकों के पासबुक, एटीएम कार्ड, क्रेडिट कार्ड और अन्य संवेदनशील दस्तावेज शामिल हैं।

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समानांतर टेलिफोन एक्सचेंज चलाने का आरोप

EOU की जांच में पता चला कि हर्षित एक अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का हिस्सा था, जो सिम बॉक्स डिवाइस के जरिए समानांतर टेलीफोन एक्सचेंज चलाता था। इस गिरोह ने वियतनाम और चीन से सिम बॉक्स डिवाइस मंगवाए थे, जिनका उपयोग कम्बोडिया, थाईलैंड और अन्य देशों में साइबर ठगी के लिए फर्जी कॉल करने में किया जाता था। यह गिरोह रोजाना 10,000 से अधिक फर्जी कॉल करता था, जिसके जरिए लोगों को ठगा जाता था।

EOU के अनुसार, हर्षित इस साइबर ठगी नेटवर्क का मुख्य सरगना था। उसने झारखंड के पाकुड़ से सुमित शाह और मोहम्मद सुल्तान नामक व्यक्तियों के जरिए करीब 1400 सिम कार्ड हासिल किए थे। इन सिम कार्ड का उपयोग फर्जी कॉल और ऑनलाइन ठगी के लिए किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि हर्षित ने पिछले कुछ वर्षों में थाईलैंड, बैंकॉक समेत कई देशों की यात्रा की थी और उसकी संपत्ति 12-14 करोड़ रुपये की है, जिसमें मोतिहारी में एक आलीशान मकान और 30-35 बैंक खाते शामिल हैं। एक बैंक खाते में 2.5 करोड़ रुपये जमा पाए गए, जिसे सील कर दिया गया है।

इस गिरोह ने साइबर ठगी से अर्जित राशि को क्रिप्टोकरेंसी में तब्दील कर लेनदेन किया, जिससे धन के स्रोत को छिपाने में मदद मिली। केंद्रीय दूरसंचार मंत्रालय के अनुसार, इस गिरोह ने केवल दो सप्ताह में 2.5 करोड़ रुपये और जनवरी 2025 से अब तक 60 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचाया है।

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