जमशेदपुर: घाटशिला विधानसभा उपचुनाव का माहौल गरमाता जा रहा है। इंडिया गठबंधन और एनडीए गठबंधन के नेता अपने-अपने वोट बढ़ाने के लिए जोर-शोर से काम कर रहे हैं। यह चुनाव झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतीकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के अस्तित्व की भी परीक्षा माना जा रहा है।
विशेष रूप से संथाल और कुरमी वोट इस चुनाव की जीत की चाबी माने जा रहे हैं। घाटशिला में लगभग 28,000 कुरमी मतदाता हैं। एनडीए का घटक दल आजसू पार्टी इस वोट बैंक पर अपना प्रभाव बनाना चाहता है। आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो, हरेलाल महतो और अन्य नेता घाटशिला में सक्रिय हैं।
लेकिन जेएलकेएम सुप्रीमो जयराम महतो ने एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए देवेंद्र नाथ महतो को मुख्य संयोजक बनाया है। यह ट्रंप कार्ड आजसू पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। याद दिला दें कि 2024 के विधानसभा चुनाव में भी देवेंद्र नाथ महतो ने सिल्ली क्षेत्र से आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो को हराकर जीत दर्ज की थी।
देवेंद्र नाथ महतो जेएलकेएम के वरिष्ठ पदाधिकारी और वर्तमान समय के बड़े आंदोलनकारी चेहरा हैं। वे झारखंड के छात्र आंदोलनों का नेतृत्व करते हैं और शोषित वंचितों के हक अधिकार के लिए लगातार संघर्षरत हैं।
उनकी लोकप्रियता शिक्षकों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, पंचायत सचिवों, राजस्व कर्मचारियों, दरोगाओं, सहायक आचार्यों, चौकीदारों, होमगार्ड, एनआरएचएम कर्मियों, मनरेगा कर्मियों और जेपीएससी-जेस्सेसी छात्रों के बीच है।
घाटशिला उपचुनाव में बीजेपी के बाबूलाल सोरेन, जेएमएम के सोमेश सोरेन और जेएलकेएम के रामदास मुर्मू के बीच त्रिकोणीय मुकाबला देखा जा रहा है। जेएलकेएम ने देवेंद्र नाथ महतो को मुख्य संयोजक, प्रेम मार्डी को प्रभारी, इकबाल अंसारी और विजय सिंह को सह-प्रभारी तथा मोतीलाल महतो को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।
प्रचार-प्रसार के लिए 20 सदस्यों की टीम भी बनाई गई है, जिसमें बेबी महतो, दमयंती मुंडा, डॉ बसंती हेम्ब्रम, पूजा कुमारी, सानिया प्रवीण, अनिता टुडू, डिम्पल चौबे, निवेदिता महतो, रेखा महतो, सबिता देवी, सुमन हंसदा, मनोज यादव, विजय साहू, संतोष महतो, प्रेम नायक, पनेश्वर कुमार, विकास हंसदा, विजय मेहता, एकलाल अंसारी और सुशील मंडल शामिल हैं।















































