जादूगोड़ा: झारखंड के घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव के बीच विकास की सुध लेने वाला कोई नजर नहीं आ रहा। पूर्वी सिंहभूम जिले के माटीगोड़ा पंचायत के दर्जनों आदिवासी आज भी गड्ढे के पानी से अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि झारखंड अलग राज्य बने 24 साल हो गए, लेकिन उनकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। धीरेन सुंडी, अर्जुन पूर्ति और मुक्ता कुई जैसी स्थानीय महिलाओं ने बताया कि उन्होंने झामुमो, कांग्रेस और भाजपा के नेताओं को वोट दिया, लेकिन उनकी आदिवासी किस्मत नहीं बदली। आज भी लगभग सौ आदिवासी परिवार शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे हैं।

माटीगोड़ा पंचायत का बड़ा झरना हिल जादूगोड़ा से 6 किलोमीटर और मुसावनी प्रखंड कार्यालय से 15 किलोमीटर दूर है। ग्रामीण बताते हैं कि पत्थलीली रास्तों और गड्ढों का पानी अब उनकी रोजमर्रा की पहचान बन चुका है। जंगल से लकड़ी काटकर बेचकर लोग अपनी भूख मिटाते हैं।
अर्जुन पूर्ति और दिनेश सुंडी के अनुसार, गड्ढे से पानी लाने के दौरान छोटे-छोटे नाले पार करना पड़ता है, और कभी पैर फिसल जाए तो अनहोनी होने का डर रहता है। कई बच्चे तो सड़क के अभाव में स्कूल छोड़ चुके हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि झारखंड अलग राज्य के 24 साल बाद भी निर्वाचित विधायक या सांसदों ने गांव का दौरा तक नहीं किया। चुनाव के समय ही नेता गांव पहुंचते हैं, लेकिन विकास और अधिकारों के मुद्दे अब भी गौण हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अब जरूरत है कि स्थानीय और राज्य सरकार इस क्षेत्र की सड़क, पेयजल और बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दें, ताकि आदिवासी बच्चों को पढ़ाई और आम लोगों को जीवनयापन में सुविधा मिल सके।















































