पटना: बिहार विधानसभा चुनाव की तेज़ होती हलचल के बीच चुनाव आयोग के सुबह 11 बजे तक आए आंकड़ों के अनुसार, एनडीए 190 सीटों पर आगे है। वहीं राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन को 50 सीटों पर बढ़त मिली है।
पार्टीवार स्थिति इस प्रकार है —
जदयू: 81, भाजपा: 78, राजद: 35, लोजपा रामविलास: 22, कांग्रेस: 7, सीपीआईएम: 4 और हम: 4 सीटों पर आगे।
मोकामा का राजनीतिक इतिहास
पटना से करीब 90 किलोमीटर दूर स्थित मोकामा विधानसभा सीट (निर्वाचन क्षेत्र–178) एक बार फिर राज्य की सबसे कड़ी और दिलचस्प लड़ाई का केंद्र बन गई है। यह सीट लंबे समय से भूमिहार नेताओं के प्रभाव और अस्थिर राजनीतिक हालात के लिए जानी जाती रही है, जहां कभी चुनाव सड़कों पर लड़े जाते थे और अपराध का दबदबा स्पष्ट दिखता था। फ़िलहाल मोकामा सीट से अनंत सिंह RJD की वीणा देवी से आगे चल रहे है.
मोकामा का चुनावी इतिहास बाहुबली नेताओं और कड़े मुकाबलों से भरा रहा है। 1980 और 1985 में कांग्रेस नेता श्याम सुंदर सिंह धीरज लगातार विधायक बने। 1990 और 1995 में उनके समर्थक और बाहुबली दिलीप सिंह ने सत्ता संभाली। इसके बाद 2000 में नए बाहुबली सूरजभान सिंह ने दिलीप सिंह को हराकर सीट अपने नाम की। 2005 में मोकामा की राजनीति में बड़ा मोड़ तब आया जब अनंत सिंह पहली बार जदयू के टिकट पर विधायक बने। 2005 के दोनों चुनाव और 2010 में उन्होंने लगातार जीत दर्ज की। 2015 में उन्होंने निर्दलीय जीत हासिल की, जबकि 2020 में वे राजद के टिकट पर फिर विजयी रहे।
2022 के उपचुनाव में उनकी पत्नी भी राजद से विधायक बनीं।
2025 में फिर बाहुबली बनाम बाहुबली
अब 2025 के चुनाव में मोकामा में एक बार फिर रोचक मुकाबला है —
राजद से सूरजभान सिंह बनाम जदयू से अनंत सिंह।
दोनों अपने-अपने गुटों और जातीय आधार पर मजबूती से चुनाव मैदान में हैं।
मोकामा का जातीय समीकरण
मोकामा का चुनाव परंपरागत रूप से महागठबंधन और एनडीए के समीकरणों पर टिका रहा है।
एनडीए का आधार वोट — सवर्ण, वैश्य, कुशवाहा, कुर्मी समुदाय।
महागठबंधन का आधार वोट — यादव, मुस्लिम, ओबीसी और कुछ दलित।
2020 में पासवान वोट बड़ी संख्या में जदयू के खिलाफ गया था। इस बार यादव नेता दुलारचंद यादव की हत्या के बाद त्रिकोणीय मुकाबला खत्म होकर लड़ाई सीधे दो बाहुबलियों के बीच सीमित हो गई है। अब निर्णायक मतदाता बने हैं — धानुक, कुर्मी और दलित समुदाय।
तेजस्वी और तेजप्रताप भी पिछड़े
राघोपुर सीट से महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के दावेदार तेजस्वी यादव पिछड़ गए हैं। वहीं महुआ सीट से उनके भाई तेजप्रताप यादव भी पीछे चल रहे हैं।