जमशेदपुर: झारखंड प्रदेश कांग्रेस द्वारा जारी नए जिलाध्यक्षों की सूची को लेकर पूर्वी सिंहभूम में विवाद बढ़ता जा रहा है। सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता आज गांधी घाट, मानगो पुल के पास शांतिपूर्ण सत्याग्रह पर बैठकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। कारण स्पष्ट है: कार्यकर्ताओं का आरोप है कि “संगठन सृजन अभियान” के तहत बनाई गई रायशुमारी और पर्यवेक्षक की रिपोर्ट को नजरअंदाज कर जिलाध्यक्ष का चयन विधायकों और मंत्रियों की सिफारिश पर किया गया।
जिला उपाध्यक्ष बबलू झा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पूर्वी सिंहभूम से कुल 72 दावेदार थे, लेकिन अंतिम चयन में उन पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पर्यवेक्षक की सूची सार्वजनिक नहीं की गई तो आंदोलन और व्यापक होगा और उन्होंने आत्मदाह तक की धमकी दे डाली।
जिला सचिव अजितेश उज्जैन ने भी कहा कि संगठन हित में गलत को गलत कहना जरूरी है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि नया जिलाध्यक्ष ज्यादातर वक्त रांची ग्रामीण में थे और उनकी नियुक्ति प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता का पालन नहीं हुआ।
सूत्रों की माने तो नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति में दो पूर्व विधायकों की सिफारिश को तरजीह दी गई है। इनमें से एक ने 2019 में कांग्रेस से बगावत कर आजसू से चुनाव लड़ा था, जबकि दूसरा प्रदेश भाजपा नेताओं के करीब माने जाते हैं। सोशल मीडिया पर भी चर्चा है कि नए जिलाध्यक्ष पदभार ग्रहण के दौरान किस खुली लाल गाड़ी में आए, और वह गाड़ी किसकी थी।
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