Jamshedpur : एसबीआई सोनारी शाखा में जमा 25 लाख होने के बावजूद इलाज के अभाव में सेवानिवृत्त शिक्षिका अंजलि बोस मरणशैय्या पर

  • नॉमिनी नहीं होने पर बैंक ने रोकी राशि, उपायुक्त से हस्तक्षेप की मांग
  • पैसे रहते भी इलाज नहीं, सरकारी सिस्टम पर उठे सवाल

जमशेदपुर : सोनारी एक्सटेंशन रोड नंबर–7 की रहने वाली झारखंड सरकार की सेवानिवृत्त शिक्षिका अंजलि बोस इन दिनों एमजीएम अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही हैं। हैरानी की बात यह है कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, सोनारी शाखा में उनके खाते में लगभग 25 लाख रुपये जमा होने के बावजूद परिजन पैसे के अभाव में उन्हें बेहतर अस्पताल नहीं ले जा पा रहे हैं। डॉक्टरों ने अंजलि बोस को टाटा मुख्य अस्पताल या किसी बड़े चिकित्सा संस्थान में रेफर करने की सलाह दी है, लेकिन बैंक से राशि नहीं मिलने के कारण इलाज बाधित है। इस पूरे मामले ने सरकारी व्यवस्था और बैंकिंग सिस्टम की संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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नॉमिनी नहीं होने का हवाला देकर बैंक ने झाड़ा पल्ला

परिजनों के अनुसार अंजलि बोस वर्ष 2008-09 में कपाली विद्यालय से सेवानिवृत्त हुई थीं। अविवाहित होने और संतान न होने के कारण उन्होंने सेवानिवृत्ति के समय मिली पूरी राशि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में जमा की थी, ताकि भविष्य में बीमारी या जरूरत के समय यह पैसा काम आ सके। लेकिन वर्तमान में बैंक प्रबंधन यह कहकर राशि देने से इनकार कर रहा है कि अंजलि बोस के खाते में कोई नॉमिनी दर्ज नहीं है और खाता धारक को स्वयं बैंक आना होगा। परिजनों ने बैंक से आग्रह किया कि अस्पताल को सीधे भुगतान कर दिया जाए, ताकि इलाज संभव हो सके, लेकिन बैंक अधिकारियों ने इस मांग को भी ठुकरा दिया।

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बहन की पीड़ा और चेतावनी ने झकझोरा

अंजलि बोस की छोटी बहन गायत्री बोस, जो स्वयं एक सेवानिवृत्त शिक्षिका हैं, ने भावुक होते हुए कहा कि उनकी बहन मरणशैय्या पर है और बैंक जाने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि पैसा किसी व्यक्ति को नहीं बल्कि सीधे अस्पताल को दिया जाए, ताकि अंजलि की जान बच सके। गायत्री बोस ने चेतावनी दी कि यदि पैसे के अभाव में उनकी बहन की मौत हो गई, तो वह अंजलि का पार्थिव शरीर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, सोनारी शाखा में ले जाकर रखेंगी। उनकी इस पीड़ा ने पूरे मामले को और भी गंभीर बना दिया है।

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उपायुक्त से हस्तक्षेप की मांग, प्रशासन की ओर टिकी निगाहें

मामले की गंभीरता को देखते हुए भाजपा के पूर्व नेता विकास सिंह एमजीएम अस्पताल पहुंचे और परिजनों से पूरी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि यह अमानवीय और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि किसी के अपने ही पैसे उसकी जान नहीं बचा पा रहे हैं। विकास सिंह ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त से इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप कर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से बात करने और अंजलि बोस के इलाज के लिए तत्काल राशि उपलब्ध कराने की मांग की है। अब यह देखना अहम होगा कि जिला प्रशासन इस मानवीय संकट में कितनी जल्दी पहल करता है और एक सेवानिवृत्त शिक्षिका की जान बचाने के लिए सिस्टम कितनी संवेदनशीलता दिखाता है।

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