खड़गपुर: भारतीय रेलवे इस समय एक बड़े रूपांतरण के दौर से गुजर रहा है। इसके अंतर्गत बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है, जो आपके नजदीकी रेलवे स्टेशन पर भी आसानी से नजर आती है। ‘अमृत स्टेशन’ के रूप में विकसित हो रहे ये स्टेशन यात्रियों की संतुष्टि का नया प्रतीक बन चुके हैं। लेकिन इस बदलते स्वरूप के पीछे छिपा तकनीकी और विस्तृत काम कम ही दिखाई देता है। आज हम बात करेंगे संतरागाछी स्टेशन की खास प्रक्रिया की, जिसे रेलवे में ‘एनआई’ यानी ‘नॉन-इंटरलॉक्ड’ कहा जाता है।

‘एनआई’ क्या है? परिचय और महत्व
अधिकांश रेलवे यात्री ‘एनआई’ शब्द से परिचित नहीं हैं। ‘एनआई’ का अर्थ है ‘नॉन-इंटरलॉक्ड वर्किंग’। रेलवे नेटवर्क सिग्नलिंग के लाल, हरे और पीले बत्तियों पर निर्भर करता है, जो लोको-पायलट को ट्रेन की यात्रा शुरू करने की अनुमति देते हैं। यह तकनीकी भाषा रेलवे की हर ट्रैनिंग गतिविधि को नियंत्रित करती है।
लेकिन जब किसी बड़े यार्ड जैसे संतरागाछी का पुनर्निर्माण किया जाता है, तब यह सिस्टम अस्थायी रूप से बंद कर दिया जाता है ताकि नए प्लेटफार्म, लाइनें और इमारतें बन सकें। उस दौरान ट्रेनों का संचालन ‘पेपर लाइन क्लियर ऑथॉरिटी’ के आधार पर होता है, न कि सिग्नलों पर।
एनआई के दौरान कैसे होता है काम?
एनआई के दिन, सिग्नलिंग सिस्टम ‘गैर-इंटरलॉक्ड’ रहता है। ट्रैक का पुनःआयोजन, नई लाइनें बिछाना, लाइन की लंबाई बढ़ाना जैसी बड़ी मरम्मत इसी दौरान होती है। स्टेशन मास्टर और पॉइंट्समैन मिलकर स्टेशन पैनल से ट्रेनों की निगरानी करते हैं। इस दौरान T-28, Unimat, PCTM जैसे अत्याधुनिक मशीनों का उपयोग होता है। रेलवे इस अवधि में ‘शैडो ब्लॉक’ का भी प्रयोग करता है, जिसमें ट्रेन का संचालन पूरी तरह बंद रहता है और अन्य क्षेत्रीय कार्य भी किए जाते हैं।

एनआई के बाद: इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग का युग
एनआई के बाद स्टेशन मास्टर को नया इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) पैनल सौंपा जाता है, जो पहले के मेकेनिकल रूट रिले इंटरलॉकिंग (RRI) से कहीं अधिक सुरक्षित और उन्नत होता है। यह पैनल ट्रेन की हर गतिविधि को विजुअल डिस्प्ले यूनिट और MSDAC (मल्टी-सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर) के माध्यम से नियंत्रित करता है। इससे ट्रेनों का संचालन अधिक कुशल, सुरक्षित और समयबद्ध हो जाता है।
संतरागाछी एनआई के प्रमुख लाभ
प्लेटफार्म नंबर 2 और 3 को बढ़ाकर अब वे पूरी लंबाई की कोचिंग ट्रेनों के लिए उपयुक्त बनाया गया है।
स्टेशन पर कुल प्लेटफार्म की संख्या छह से बढ़ाकर आठ कर दी गई है, नए प्लेटफार्म 4 और 5 शामिल किए गए हैं।
संक्राइल से संतरागाछी तक एक द्विदिशात्मक लाइन जोड़ी गई है, जिससे दोनों दिशाओं में ट्रेनों का संचालन संभव हुआ। यह नया फ्लायओवर हावड़ा से आने वाली ट्रेनों की देरी को कम करेगा।
एनआई अवधि में यात्रियों की असुविधा और रेलवे की तैयारी
एनआई के दौरान ट्रेन रद्दीकरण, पुनर्निर्धारण और शॉर्ट टर्मिनेशन/शॉर्ट ओरिजिनेशन जैसे कदम जरूरी होते हैं। रेलवे पूरी कोशिश करता है कि यात्रियों को न्यूनतम असुविधा हो। इसके लिए पहले से SMS, प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के जरिए सूचना दी जाती है। स्टेशन पर सहयक काउंटर 24 घंटे सक्रिय रहते हैं। यात्रियों की सहायता के लिए वाणिज्यिक और आरपीएफ कर्मचारी भी तैनात होते हैं। इसके अलावा, डिवीजन स्तर पर ‘वार रूम’ भी स्थापित होता है, जो पूरी प्रक्रिया की निगरानी करता है।
रेलवे का विकास: संतरागाछी से देश की सेवा
संतरागाछी अमृत स्टेशनों में से एक है, जो खड़गपुर डिवीजन के कुल 19 अमृत स्टेशनों में शामिल है। एनआई का काम रेलवे के अन्य स्टेशनों पर भी युद्धस्तर पर जारी है। रेलवे की यह योजना स्तर क्रॉसिंग समाप्त करना, विद्युतीकरण, और नेटवर्क का आधुनिकीकरण सुनिश्चित करती है। इससे वंदे भारत और अमृत भारत जैसी नई तेज ट्रेनें भी सुचारू रूप से चल सकेंगी।
रेलवे के लिए विकास ही जीवनरेखा है और यही कारण है कि ‘डिवेलपमेंट के लिए रेलवे इंटरलॉक्ड है।’


















































