दुनिया भर के मुसलमानों से एकजुट होने की अपील की
नई दिल्ली : ईरान के शीर्ष शिया धर्मगुरु ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ फतवा जारी किया है।उन्होंने उसमें दुनिया भर के मुसलमानों से एकजुट होने की अपील की है। 12 दिनों तक चलते ईरान और इजरायल के बीच जंग के बाद ट्रंप ने 24 जून को संघर्ष विराम का ऐलान किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अयातुल्लाह नसीर मकरम शिराजी ने फतवा जारी किया है, जिसमें ट्रंप और नेतन्याहू को ‘दुश्मन’ बताया है। उन्होंने लिखा, ‘यह साफ है कि इस्लामिक व्यवस्था के किसी व्यक्ति और खासतौर से सुप्रीम लीडर को जान से मारने की धमकी देना मना है और धार्मिक रूप से निषेध है।’ उन्होंने कहा, ‘उनका बचाव करना और ऐसी धमकियां देने वाले आरोपियों को जवाब देना जरूरी है। साथ ही पवित्रता का उल्लंघन करना सबसे बड़े पापों में से एक है।’ उन्होंने इस्लामिक गणतंत्र के नेतृत्व को धमकी देने वाले अमेरिकी और इजरायली नेताओं के खिलाफ कार्रवाई का आह्वान किया है। फतवा में यह भी कहा गया है, ‘उस दुश्मन के लिए मुसलमानों या इस्लामिक मुल्कों की तरफ से किसी भी तरह का सहयोग देना हराम है। यह जरूरी है कि दुनिया भर के मुसलमान इन दुश्मनों को उनके शब्दों और गलतियों के लिए पछतावा कराएं।
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ईरानी सैन्य कमांडरों को लाखों लोगों ने दी अंतिम विदाई
इजरायल के साथ 12 दिनों के युद्ध के दौरान मारे गए रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख और अन्य वरिष्ठ सैन्य कमांडरों तथा परमाणु वैज्ञानिकों की अंत्येष्टि में शामिल होने के लिए शनिवार को तेहरान की सड़कों पर लाखों लोग उमड़ पड़े। रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख जनरल हुसैन सलामी, इसके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के प्रमुख जनरल आमिर अली हाजीजादेह और अन्य के ताबूतों को ट्रकों पर रखकर राजधानी की आजादी स्ट्रीट से ले जाया गया। इस दौरान सड़क किनारे खड़े लोगों ने ”अमेरिका मुर्दाबाद” और ‘इजरायल मुर्दाबाद’ के नारे लगाए। जनरल सलामी और हाजीजादेह दोनों 13 जून, यानी युद्ध के पहले दिन ही मारे गए थे, जब इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करने के उद्देश्य से व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया था। इस अभियान में सैन्य कमांडरों, वैज्ञानिकों और परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया।
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