Jamshedpur : तुलसी भवन में हिन्दी दिवस पर कार्यशाला एवं सम्मान समारोह सम्पन्न, 64 शिक्षकों को मिला सम्मान

  • हिन्दी दिवस पर शिक्षण की नई विधाओं पर हुई चर्चा

जमशेदपुर : सिंहभूम जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन / तुलसी भवन द्वारा राष्ट्रभाषा हिन्दी दिवस के अवसर पर मुख्य सभागार में हिन्दी शिक्षक कार्यशाला एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय आधुनिक शिक्षक और रुचिकर हिन्दी शिक्षण तथा हिन्दी शिक्षण का औचित्य और भाषा संवर्धन रहा। सत्र विशेषज्ञ डॉ. मोनिका उप्पल एवं डॉ. जंग बहादुर पाण्डेय ने शिक्षकों को सरल एवं प्रभावी तरीकों से हिन्दी शिक्षण की नई विधाओं से अवगत कराया। कार्यक्रम के दोनों सत्रों का संचालन सुरेश चन्द्र झा एवं डॉ. मुदिता चंद्रा ने किया, जबकि अध्यक्षता संस्थान के न्यासी अरुण कुमार तिवारी ने की। मंच पर अरका जैन विश्वविद्यालय के निदेशक डॉ. अंगद तिवारी एवं उत्तर प्रदेश संघ के अध्यक्ष अखिलेश दुबे अतिथि रूप में उपस्थित रहे।

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श्रेष्ठ हिन्दी शिक्षक सम्मान से शेषनाथ सिंह शरद हुए सम्मानित

इस अवसर पर तुलसी भवन की ओर से प्रदान किया जाने वाला श्रेष्ठ हिन्दी शिक्षक सम्मान साकची हाई स्कूल के सेवानिवृत्त शिक्षक एवं वरिष्ठ कवि शेषनाथ सिंह शरद को दिया गया। उन्हें पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह, श्रीफल, सम्मान पत्र एवं ग्यारह हजार रुपये की नगद राशि प्रदान की गई। सम्मान प्राप्त करने के बाद शरद ने भावुक होकर कहा कि तुलसी भवन ने उन्हें इस सम्मान के लिए चयनित कर उनकी साहित्यिक एवं शैक्षणिक यात्रा को सार्थक बना दिया है। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और उपासना सिन्हा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। स्वागत भाषण मानद महासचिव डॉ. प्रसेनजित तिवारी एवं धन्यवाद ज्ञापन उपाध्यक्ष रामनन्दन प्रसाद ने प्रस्तुत किया।

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64 शिक्षकों को पुष्पगुच्छ व प्रमाण पत्र देकर किया गया सम्मानित

कार्यक्रम के अंत में शहर के 30 विद्यालयों से आए कुल 64 हिन्दी शिक्षक-शिक्षिकाओं को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र, उपहार और प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर नगर के अनेक साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें डॉ. रागिनी भूषण, डॉ. यमुना तिवारी ‘व्यथित’, अरुणा भूषण शास्त्री, प्रसन्न वदन मेहता, डॉ. अनिता निधि, उमा पाण्डेय, पूनम सिंह, डॉ. अरुण कुमार शर्मा, जितेश तिवारी, उपासना सिन्हा, बलविंदर सिंह, अशोक पाठक स्नेही, मनीष सिंह वंदन आदि शामिल थे। कार्यक्रम ने न केवल हिन्दी शिक्षण के महत्व को रेखांकित किया बल्कि शिक्षकों को समाज निर्माण की मुख्यधारा में योगदान देने के लिए प्रेरित भी किया।

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