सरायकेला: सरायकेला के एन.आर. जिला मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय में समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जिला स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला शिक्षा अधीक्षक कैलाश मिश्रा ने दीप प्रज्वलित कर किया।
मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि “दिव्यांग बच्चों को समान अवसर देना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।” उन्होंने बताया कि शिक्षकों का काम केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि समाज में समावेशिता की भावना को मजबूत करना भी है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि शिशु पंजी में दिव्यांग बच्चों का विवरण अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए।
रिसोर्स शिक्षकों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी
प्रसनजीत नाथ ने 21 प्रकार की दिव्यांगताओं की पहचान और शिक्षण विधियों में सुधार की दिशा में शिक्षकों की भूमिका समझाई।
नरेंद्र प्रसाद सिंह ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के अंतर्गत 5% स्कूल और 4% सरकारी नौकरी में आरक्षण, तथा भेदभाव पर ₹50,000–₹5,00,000 जुर्माने और 6 माह–2 साल की सजा का विवरण दिया।
सीमा कुमारी ने केंद्र एवं राज्य सरकार की दिव्यांगजन कल्याणकारी योजनाओं जैसे UDID कार्ड, छात्रवृत्ति, सहायक उपकरण वितरण, रेलवे रियायत प्रमाण पत्र, ब्रेल पुस्तकें और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी दी।
समावेशी शिक्षा के जिला प्रभारी मनोज कुमार ने कहा कि सरकार दिव्यांग बच्चों को समान अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है और शिक्षक इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी शिक्षकों से अनुरोध किया कि वे दिव्यांग बच्चों की आवश्यकता को समझते हुए उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ें।
कार्यक्रम का संचालन प्राथमिक विद्यालय मिर्गी स्वादा के प्रभारी जयदेव त्रिपाठी ने किया। कार्यशाला में सरायकेला, खरसावां और कुचाई प्रखंड के प्राथमिक एवं नव-प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक शामिल हुए।
आगामी प्रशिक्षण:
12 दिसंबर: चांडिल, ईचागढ़ और नीमडीह प्रखंड
13 दिसंबर: राजनगर, गम्हरिया और कुकुडू प्रखंड
इसे भी पढ़ें :
Bahragora: बाबा सत्यनाथ शिव मंदिर के 100 साल पूरे, पांच दिन चलेगा धार्मिक महोत्सव




















































