पोटका : हेंसड़ा में हरि कीर्तन के पश्चात पूरे गांव के बुजुर्ग नौजवान बच्चे सभी मिलकर जमीन को गिला कर एक दूसरे को कादो लगाकर धूलेट का आनंद लेते नजर आए, वहीं धूलेट का आयोजन एक प्राचीन धार्मिक परंपरा के रूप में किया जाता है। कीर्तन समाप्ति के बाद श्रद्धालु एकत्र होकर धूलेट में भाग लेते हैं, जिसमें आपसी प्रेम, भाईचारा और भक्ति भाव का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। इस दौरान लोग एक-दूसरे पर हल्का अबीर-गुलाल लगाकर भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं।
ग्राम प्रधान राम रंजन प्रधान ने बताया कि धूलेट की परंपरा का उद्देश्य समाज में एकता और सौहार्द को बढ़ावा देना है। मान्यता है कि इस आयोजन से नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में यह आयोजन सामूहिक भागीदारी का प्रतीक माना जाता है, जहां सभी वर्गों के लोग बिना किसी भेदभाव के शामिल होते हैं। इसकी खासियत यह है कि यह केवल उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जुड़ाव का माध्यम भी है, जो लोगों को आपस में जोड़ने का कार्य करता है।
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