- बेघर लोगों की ठंड से जंग, सरकारों से ठोस कदम उठाने की मांग
जमशेदपुर : भारत में इस बार की शीतलहर ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। भाजपा किसान मोर्चा झारखंड प्रदेश के नेता सह हिन्दू धर्म रक्षमंच के मंत्री जय प्रकाश पांडेय ने कहा कि इस बार की ठंड ने नागरिकों को बेहाल कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार 400 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। आंगनवाड़ी सेविकाएं, जो लगभग 28 लाख की संख्या में कार्यरत हैं, बेहद कम मानदेय पर काम कर रही हैं और उन्हें वेतनमान, ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं। इन सेविकाओं को न तो गर्म कपड़े दिए गए हैं और न ही उचित पोषण सामग्री। परिणामस्वरूप कई सेविकाएं भूख और ठंड से दम तोड़ चुकी हैं। वहीं, लगभग 11 करोड़ 20 लाख आंगनवाड़ी बच्चों को भी उचित पोषण और सुरक्षा नहीं मिल पा रही है।
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शीतलहर का असर केवल बच्चों और सेविकाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे किसानों और मजदूरों पर भी भारी पड़ रहा है। गरीबी, कुपोषण और कर्ज से दबे लोग ठंड के कारण मौत का शिकार हो रहे हैं। भारत के कई राज्यों जैसे दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड, बिहार, उत्तरप्रदेश, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और असम में ठिठुरन से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार हर साल लगभग 800 लोग ठंड से मरते हैं, जिनमें अधिकतर मजदूर और बेघर लोग शामिल होते हैं। विकसित देशों में मौसम की मार से बचने के लिए ठोस इंतजाम होते हैं, लेकिन भारत में गरीबों के लिए ऐसी कोई स्थाई व्यवस्था नहीं है।
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फुटपाथों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर रात गुजारने वाले बेघर लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। रैन बसेरों की व्यवस्था कई जगह अधूरी है या बिल्कुल नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार राज्य सरकारों को फटकार लगाई है कि जहां रैन बसेरा संभव नहीं है, वहां अलाव जलाने की व्यवस्था की जाए। लेकिन सरकारी तंत्र की अदूरदर्शिता और लापरवाही के कारण गरीब लोग ठंड से बचने के लिए खुद ही अलाव जलाने और अस्थायी झोपड़ियां बनाने को मजबूर हैं। करोड़ों लोग आज भी टाट और प्लास्टिक की झोपड़ियों में ठिठुरते हुए रात बिताते हैं।
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जय प्रकाश पांडेय ने कहा कि सरकारों को गरीबों और बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। आंगनवाड़ी सेविकाओं को उचित वेतनमान और सुविधाएं दी जानी चाहिए ताकि वे बच्चों को पोषण और शिक्षा दे सकें। गरीबों के लिए रैन बसेरों, गर्म कपड़ों और पोषण सामग्री की व्यवस्था की जानी चाहिए। भारत में हर साल मौसम की मार से हजारों मौतें होती हैं, जो केवल ठंड या गर्मी से नहीं बल्कि गरीबी और व्यवस्था की नाकामी से होती हैं। यदि भारत को आर्थिक शक्ति बनना है तो सबसे पहले गरीबों और नौनिहालों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।
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