Parivartani Ekadashi 2025: परिवर्तिनी एकादशी आज, करवट बदलेंगे प्रभु, जरूर सुने यह कथा

नई दिल्ली:  हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को बहुत शुभ और आध्यात्मिक माना गया है। यह हर माह दो बार आती है – शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को। पूरी तरह से भगवान विष्णु को समर्पित यह दिन भक्तों के लिए पुण्यदायी माना जाता है।

भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को “परिवर्तिनी एकादशी” कहते हैं। इसका अर्थ है – बदलाव लाने वाली। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हुए करवट बदलते हैं और एक रूप में पाताल लोक में राजा बलि के साथ निवास करते हैं।

पूजा और व्रत की परंपरा
इस दिन भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं।
व्रत धारण कर हरि नाम का संकीर्तन और रात्रि जागरण किया जाता है।
भगवान के वामन रूप की विशेष पूजा होती है।
परंपरागत रूप से दही-चावल और चाँदी का दान भी किया जाता है।
कहा जाता है कि इस व्रत से न केवल पाप नष्ट होते हैं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति भी होती है।

वामन अवतार और राजा बलि की कथा
धर्मग्रंथों के अनुसार, त्रेतायुग में असुरराज बलि ने विशाल यज्ञ का आयोजन किया। भगवान विष्णु वामन अवतार लेकर उसके पास पहुँचे और तीन पग भूमि मांगी। बलि ने वचन दे दिया। वामनदेव ने विराट रूप धारण किया और दो पगों में पूरी सृष्टि नाप ली। तीसरे पग के लिए स्थान न बचने पर बलि ने अपना सिर अर्पित कर दिया। विष्णु ने उसका सिर दबाकर उसे पाताल लोक भेज दिया और वचन दिया कि वे स्वयं पाताल लोक में उसके साथ रहेंगे।

यही कारण है कि इस एकादशी को परिवर्तिनी यानी करवट बदलने वाली एकादशी कहा जाता है।

शास्त्रों में कहा गया है कि परिवर्तिनी एकादशी का व्रत करने से भक्त के जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है। यह व्रत पापों का नाश करता है, सुख-समृद्धि और ईश्वर की विशेष कृपा का मार्ग खोलता है।

 

 

इसे भी पढ़ें :

Deoghar: देवघर में 1.18 करोड़ से बनेगा संताल परगना का सबसे भव्य दुर्गा पंडाल, राजस्थान दरबार जैसा दिखेगा नज़ारा
Spread the love
  • Related Posts

    Jadugora : भूमिज-समाज के ओल गुरु महेन्द्रनाथ सरदार से दिनेश सरदार ने की शिष्टाचार मुलाकात, भूमिज समाज के मुद्दे पर की चर्चा

    जादूगोड़ा : भूमिज-समाज के ओल गुरु महेन्द्रनाथ सरदार के पैतृक गांव उड़ीसा के (गोहालडंगरी ) माधवडीह पहुंच कर झारखंड व ओडिशा राज्य के भारतीय आदिवासी भूमिज समाज के राष्ट्रीय महासचिव…

    Spread the love

    आस्था का अनूठा संगम: गमारिया के जलेश्वर शिव मंदिर में गाजन पर्व की धूम, भोक्ताओं ने जीभ में छड़ घोंपकर व अंगारों पर चलकर दिखाई शिव भक्ति

    बहरागोड़ा : प्रखंड की ब्राह्मणकुंडी पंचायत अंतर्गत गमारिया स्थित ऐतिहासिक जलेश्वर शिव मंदिर में सात मौजा (गमारिया, छोटा कुलिया, कोषतडुआ, बड़ा कुलिया, नेतरा, जाउड़ी और केंद्रडीहा) के ग्रामीणों द्वारा सामूहिक…

    Spread the love

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    Share this Page

    Slide-In Box help you to share the page on the perfect time