विधायक सरयू राय के तारांकित प्रश्न पर विधानसभा में सरकार ने दिया जवाब
जमशेदपुर : झारखण्ड सरकार सारंडा वन प्रमण्डल क्षेत्र में 314.68 वर्गकिलोमीटर क्षेत्र को वन्यप्राणी आश्रयणी (सेंक्चुअरी) घोषित करने के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 13 नवम्बर, 2025 को पारित आदेश को हू-ब-हू लागू नहीं करेगी, बल्कि आदेश के कतिपय बिन्दुओं पर स्पष्टीकरण हेतु माननीय सर्वोच्च न्यायालय में समीक्षा याचिका दायर करेगी। यह जानकारी आज सरकार ने झारखण्ड विधानसभा में विधायक श्री सरयू राय के तारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में दिया है।
वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने अपने उत्तर में स्वीकार किया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने सारंडा वन प्रमण्डल के 314.6825 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से छहः कंपार्टमेंट को छोड़कर तीन माह के भीतर वन्यप्राणी आश्रयणी घोषित करने का निर्देश दिया है। सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश को लागू करने की तीन माह की समय-सीमा गत 12 फरवरी, 2026 को पूरी हो गई है, परन्तु राज्य सरकार ने अभीतक सारंडा वन प्रमण्डल क्षेत्र को वन्यप्राणि अभ्यारण्य घोषित करने के बारे में अधिसूचना निर्गत नहीं किया है।
इस पर विधायक सरयू राय ने विधानसभा में सरकार से पूछा कि क्या सरकार उक्त क्षेत्र को वन्यप्राणी क्षेत्र घोषित करना चाहती है अथवा नहीं ? इसपर सरकार ने उत्तर दिया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को हू-ब-हू लागू करने के बदले सर्वोच्च न्यायालय में एक समीक्षा याचिका दायर की गई है। समीक्षा याचिका किस तिथि को दायर की गई है, यह याचिका सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वीकृत हुई है अथवा नहीं, इसके बारे में राज्य सरकार ने अपने लिखित उत्तर में कोई जानकारी नहीं दिया है। प्रश्नोत्तर की प्रति संलग्न है।
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