रडार न्यूज डेस्क
रांचीः झारखंड विधानसभा में बजट सत्र के दौरान जिस प्रकार कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में हुए कथित घोटाले को लेकर सरकार को घेरने का प्रयास किया, इससे यह जाहिर है कि कांग्रेस अप्रत्यक्ष रुप से सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास कर रही है, दरअसल यह कांग्रेस की सोची समझी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. वहीं दूसरे शब्दों में कहें तो कांग्रेस सरकार का विरोध तो कर रही है लेकिन सरकार से अलग होने की बात नहीं करती. कांग्रेस की बेचैनी व छटपटाहट इस बात को लेकर है कि सत्ता में जेएमएम के बाद महत्वपूर्ण घटक होने के बावजूद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा कांग्रेस के नेताओं को उतनी तरजीह नहीं दिया रहा हैं. वहीं कांग्रेस पार्टी इस विरोध के आसरे अपनी स्थिति को मजबूत करने के प्रयास में है. रडार न्यूज 24 ने इस मुद्दे पर राजनीतिक, सामाजिक एवं बुद्धिजीवी वर्ग के लोगों से बातें की उनके विचार जानने का प्रयास किया. आइए जानते है कि राजनीतिक, सामाजिक एवं बुद्धिजीवी वर्ग के लोगों ने इस मुद्दे पर क्या कहा ………..
जनहित के मुद्दे पर सरकार का विरोध रहेगा जारी – आनंद बिहारी दुबे

कांग्रेस पार्टी के पूर्वी सिंहभूम जिला अध्यक्ष आनंद बिहारी दुबे का कहना है कि पार्टी जनहित के मुद्दे पर सड़क से लेकर सदन तक सरकार का विरोध करेगी. पार्टी जनहित के मुद्दे पर किसी भी प्रकार की कोई समझौता करने को तैयार नहीं.
कांग्रेस कर रही है दबाव की राजनीति – सुधांशु

वहीं भाजपा के जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष सुधांशु ओझा का कहना है कि कांग्रेस पार्टी दबाव की राजनीति कर रही है.यह जगजाहिर है कि सत्ता पक्ष के ज्यादातर विधायक पैसे उगाही के कार्य में लगे हुए हैं. यह भी स्पष्ट है कि हेंमेत सरकार आंकठ तक भ्रष्टाचार में डुबी हुई है. ऐसे में यदि सही मायने में कांग्रेस जनहित के मुद्दे को लेकर सरकार का विरोध करना चाहती है तो जेपीएससी एवं पेपर लीक मामले में भी कांग्रेस को सरकार का विरोध करना चाहिए. लेकिन ऐसा नहीं है, मतलब साफ है कि कांग्रेस अपने स्वार्थ सिद्धि के हिसाब से सरकार का विरोध एवं समर्थन कर रही है.
सरकार में रहते हुए अपनी अलग पहचान के लिए कांग्रेस कर रही है विरोध – मुकेश

पूर्वी सिंहभूम जिला मारवाड़ी सम्मेलन के जिला अध्यक्ष मुकेश मित्तल काकहना है कि झारखंड में कांग्रेस सरकार का हिस्सा होते हुए भी सदन में उसकी ओर से सरकार की कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाना एक गंभीर राजनीतिक संकेत है. यह घटना सत्ता के अंदर जारी अंतर्कलह और राजनीतिक अस्थिरता की ओर इशारा करती है. संभावित कारणों में शामिल हो सकता है कि कांग्रेस को सरकार में वह सम्मानजनक भागीदारी नहीं मिल रही है. जो उसे अपेक्षित थी, या फिर उसके हितों की अनदेखी हो रही है. साथ ही, आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखना चाहती है ताकि भविष्य में गठबंधन राजनीति में बेहतर सौदेबाजी कर सके. इसके अलावा, यह भी हो सकता है कि पार्टी राज्य सरकार की कुछ नीतियों से सहमत न हो और जनता के बीच अपनी साख बचाने के लिए ऐसा कदम उठाया हो. कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम झारखंड की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत देता है.
सदन में कांग्रेस द्वारा सरकार का विरोध छलावा मात्र है – श्रीमन त्रिगुण

शिक्षाविद् श्रीमन त्रिगुण का कहना है कि झारखंड विधानसभा में सत्ता पक्ष में रहते हुए कांग्रेस पार्टी का विरोध कहां तक तर्कसंगत है? यह विरोध एकतरफ तो ये बता रहा है कि जो विपक्ष (NDA)को करना चाहिए,उसे सत्ता पक्ष ही युवा तुर्क की भूमिका में लोकतंत्र को मजबूत कर रहा है, यदि वाकई में ऐसा है तो लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है. लेकिन कांग्रेस का विरोध कभी भी विधानसभा में विद्यार्थियो(प्रतियोगी परीक्षा JPSC, JSSC) के हित मे नहीं होना सोचने को मजबूर करता है. ऐसा प्रतीत हो रहा है कि कहीं न कहीं बोर्ड/निगम में पद हथियाने को लेकर दबाव की राजनीति हो रही है? या जेएमएम द्वारा कांग्रेस को तवज्जो नहीं दिया जा रहा है, यही कारण है कि कांग्रेस सरकार का विरोध कर रही है.
क्या है पूरा मामला
झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में 100 करोड़ रुपए के गबन और घोटाले को लेकर बुधवार को विधानसभा में सत्ता पक्ष के विधायकों ने ही सरकार को घेर लिया. मंत्री योगेंद्र प्रसाद के जवाब पर विधायकों ने असंतोष जताया. प्रश्न काल के दौरान कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने विभाग के स्वर्णरेखा प्रमंडल में फर्जी खाते खोलकर करोड़ों की निकासी का मामला उठाया. उन्होंने वित्त विभाग की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में कई अभियंताओं की संलिप्तता उजागर हुई है, लेकिन अब तक केवल रोकड़पाल संतोष कुमार के खिलाफ ही कार्रवाई की गई है. इस सवाल पर विभागीय मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने आश्वासन दिया कि मामले की विभागीय जांच कर सात दिनों के भीतर सदन को अवगत कराया जाएगा. वहीं कांग्रेस के रामेश्वर उरांव ने मंत्री के जवाब पर असंतोष जताते हुए कहा कि कार्रवाई के बजाय मामले को टालने की कोशिश हो रही है. स्टीफन मरांडी ने आरोप लगाया कि कार्यपालक अभियंता को बचाने की कोशिश की जा रही है, जबकि रामेश्वर उरांव ने कहा कि किसी तरह कार्रवाई को अधर में लटका देने की साजिश हो रही है.
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