Chandil : ईचागढ़ विधान सभा क्षेत्र में हाथियों का आतंक, केज कल्चर को कर रहे क्षतिग्रस्त

 

Chandil : सरायकेला खरसावां जिला के ईचागढ़ विधान सभा क्षेत्र में हाथियों का आतंक बढ़ता जा रहा है. आपको बता दे कि चांडिल डैम जलाशय के आसपास में गजों ने डेरा जमा रखा है.  दिन भर जंगल में रहने के बाद दोपहर या शाम के आसपास गजों का झुंड जलाशय में जलक्रीड़ा करने आ जाते है.  चांडिल बांध विस्थापित मत्स्यजीवी समिति के मत्स्य मित्रों के संदेश को फ़िसरिस विभाग द्वारा केज कल्चर के माध्यम से फ़ंगसी मछली उत्पादन के लिए क्रेज कल्चर का निर्माण किया गया है। जलाशय के विभिन्न जगह पर मछली उत्पादन होते हैं ।  क्रेज कल्चर जलाशय के आसपास हाथियों ने डेरा डाले हुए है। भीषण गर्मी के दौरान हाथी क्रेज के साथ खेलते और उन्हे क्षतिग्रस्त कर देते है.

नागरिक दहशत के माहौल में

समिति के मस्ती मित्र ने कहा कि जलाशय के किनारे बहुत सारे हम लोग का क्रेज लगाया गया है साथ ही उक्त क्रेज में फंगस का मछली उत्पादन किया जा रहा है। जिसमें नेट लगा हुआ है ।  हाथियों द्वारा क्रेज की नेट को तोड़ देने से मछली जलाशय में चली जा रही है.  जिससे हम लोगो को क्षति हो रही है । इसकी सूचना  चांडिल वन क्षेत्र पदाधिकारी को पूर्व में दिया गया था। गजों के आतंक से पूरे ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के आम नागरिक दहशत के माहौल में रहने को मजबूर है.

भोजन के लिए हाथी गांव में आ रहे है

प्रतिदिन चांडिल डैम भ्रमण करने पश्चिम बंगाल,उड़ीसा ,बिहार आदि राज्यों से पर्यटक पहुंच रहे है। परिवार के साथ जलाशय में वोटिंग के दौरान जंगली हाथियों के झुंड को खुले में जलक्रीड़ा करते हुए देखकर आनंदित होते हैं .  यादगार पल को ताजा करने के लिए मोबाइल में फोटोग्राफी एवं सेल्फी लिया जाता है , दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी रहने के बावजूद आज हाथी के झुंड गज परियोजना से पलायन कर ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के चारों प्रखंड के छोटे-बड़े जंगल में डेरा डाले हुए है ,शाम ढलते ही गांव एवं शहरी क्षेत्र में घुसकर भोजन की तलाश में घरों में दुकानों को टारगेट बना रहे हैं, विशाल ट्रस्कर होने के कारण भरपेट भोजन पौष्टिक आहार की कमी को पूर्ति करने के लिए शाम को गांव में प्रवेश कर जाते हैं एवं उपद्रव मचाते हैं । वन्य जीवजंतु के संरक्षण के लिए , केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा करोड़ों रुपया वन एवं पर्यावरण विभाग को फंड मुहैया कराते हैं फिर भी जंगल में भोजन के पौष्टिक आहार नहीं मिलने के कारण आज गांव एवं शहरी क्षेत्र में हाथी विचरन करते देखे जा रहे है.

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