Jamshedpur: झारखंड आंदोलन के संगठनों ने आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर की एकजुट रहने की अपील

जमशेदपुर:  झारखंड आंदोलन से जुड़े विभिन्न संगठनों, सामाजिक न्याय के कार्यकर्ताओं और जनांदोलन के प्रतिनिधियों ने आज एक संयुक्त प्रेस बयान जारी कर देशभर के आदिवासी, दलित, अल्पसंख्यक और मेहनतकश समुदायों से एकता बनाए रखने और भारत के संघीय ढांचे पर हो रहे हमलों के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की।

नेताओं ने कहा कि मणिपुर, लद्दाख, छत्तीसगढ़, ओडिशा, कश्मीर और झारखंड में आदिवासी, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकार, संस्कृति और स्वायत्तता पर लगातार हमले हो रहे हैं। इन हमलों के पीछे आरएसएस-भाजपा की “एक राष्ट्र, एक भाषा, एक धर्म” की विचारधारा काम कर रही है। इसका मकसद भारत की विविधता को खत्म करना और कारपोरेट पूंजी के हित साधना है।

प्रेस बयान में मणिपुर की घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा गया कि वहां भाजपा की डबल इंजन सरकार ने पहाड़ी और मैदानी समुदायों के बीच जानबूझकर विभाजन पैदा किया। इसी तरह लद्दाख में शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी और छठी अनुसूची व राज्य के दर्जे की मांग को कुचलने के प्रयास किए जा रहे हैं।

नेताओं ने चेतावनी दी कि झारखंड सहित आदिवासी बहुल राज्यों में प्राकृतिक संसाधनों की लूट और स्वायत्तता को कमजोर करने की नीतियां लगातार जारी हैं। झारखंड को आंतरिक मसलों में उलझाकर रखा जा रहा है ताकि जनता राष्ट्रीय स्तर पर इन चालों के खिलाफ एकजुट न हो सके।

प्रेस बयान में बताया गया कि चल रहे SIR (वोटर लिस्ट पुनरीक्षण) प्रक्रिया का इस्तेमाल दबे-कुचले और अल्पसंख्यक वर्गों के मतदाता हटाने के लिए किया जा रहा है। इसका उद्देश्य उनकी राजनीतिक ताकत कमजोर करना और कॉरपोरेट समर्थित सत्ता स्थापित करना है।

हस्ताक्षरकर्ताओं ने झारखंड के लोगों से कहा कि संकीर्ण राजनीतिक मतभेदों में उलझने के बजाय साझा सामाजिक रिश्तों और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करें। लोकतांत्रिक और सेकुलर सरकार की रक्षा करना हमारी साझा जिम्मेदारी है।

उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे:
एक-दूसरे के साथ एकता बनाए रखें,
अन्य क्षेत्रों के संघर्षों के साथ एकजुटता दिखाएं,
मतदाता सूची से अपना नाम हटने न दें और मताधिकार का प्रयोग करें,
कारपोरेट लूट और सांप्रदायिक विभाजन के खिलाफ मुखर रहें।

झारखंड आंदोलन से जुड़े संगठनों और कार्यकर्ताओं ने दोहराया कि वे भारत की विविधता, संघीय ढांचे और मेहनतकश वर्गों—आदिवासी, दलित, अल्पसंख्यक सभी समुदायों—के अधिकारों की रक्षा के लिए कटिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि केवल एकजुट होकर ही इस साजिश को नाकाम किया जा सकता है। बिन्दे सोरेन, अजीत तिर्की, पुष्कर महतो, मदन मोहन सोरेन, रजनी मुर्मू, अलोका कुजूर, दीपक रंजीत, नासिर खान, संगीता बेक, लक्ष्मी गोप, विश्वजीत प्रमाणिक, गौतम कुमार बोस और अन्य।

 

 

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