चांडिल: सरायकेला-खरसावां जिला स्थित चांडिल डैम जलाशय इन दिनों पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है। भीषण गर्मी में जहां लोग प्राकृतिक ठंडक और मनोरंजन की तलाश में हैं, वहीं चांडिल डैम का हरा-भरा वातावरण, शांत जलराशि और खुले में जंगली हाथियों की मौजूदगी पर्यटकों को रोमांचित कर रहा है।
दलमा से चांडिल तक गजों का सफर
पिछले कुछ वर्षों से दलमा वाइल्डलाइफ सेंचुरी से भोजन और पानी की तलाश में हाथियों का झुंड ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के आसपास के छोटे-बड़े जंगलों में आकर डेरा डाल रहा है। गर्मी के मौसम में ये हाथी अक्सर चांडिल डैम जलाशय के किनारे पहुंचते हैं, जहां वे खुले में जलक्रीड़ा करते हुए देखे जा सकते हैं।

पर्यटकों को मिला दुर्लभ दृश्य
पर्यटकों को डैम में बोटिंग करते समय जब अचानक जंगली हाथियों का झुंड पानी में मस्ती करता हुआ दिखा, तो उनके चेहरों पर उत्साह और रोमांच साफ झलकने लगा। कई पर्यटकों ने कहा कि यह जीवन भर नहीं भूलने वाला अनुभव है – खुले में हाथियों को इतने पास से देखना और उनका प्राकृतिक व्यवहार कैमरे में कैद करना अद्भुत रहा।
विस्थापितों को मिला स्वरोजगार, बोटिंग और मछली पालन से आत्मनिर्भरता
झारखंड सरकार, केंद्र सरकार, पर्यटन विभाग और मत्स्य विभाग के संयुक्त प्रयास से डैम के विस्थापितों को क्रेज कल्चर के माध्यम से मछली उत्पादन में लगाया गया है। इसके अलावा, पर्यटकों के लिए बोटिंग की व्यवस्था भी विस्थापित समिति को सौंपी गई है, जिससे उन्हें स्वरोजगार का अवसर मिला है।
वन्यजीवों के संरक्षण की मांग
स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने मांग की है कि सरकार को डूब क्षेत्र के आसपास वन्य जीवों के लिए विशिष्ट क्षेत्र चिन्हित करना चाहिए, जहां पौष्टिक आहार वाले पौधों का रोपण हो और हाथियों सहित अन्य वन्य प्राणियों को स्थायी रूप से संरक्षण मिल सके। इससे क्षेत्र में सालभर पर्यटकों की आवाजाही बनी रहेगी और विस्थापितों को भी स्थायी रोजगार मिल सकेगा।
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