झाड़ग्राम: मेदिनिपुर कॉलेज के अंग्रेजी विभाग द्वारा 23 सितंबर को आयोजित एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “दक्षिण एशियाई साहित्य में संवेदनशीलता: संकट और समुदाय को समझना” ने समकालीन दक्षिण एशियाई साहित्य में संकट और संवेदनशीलता के विभिन्न पहलुओं को समझने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।
इस सम्मेलन में देश-विदेश के 100 से अधिक शोधकर्ता और प्रोफेसर शामिल हुए। उनके विचारोत्तेजक विमर्श ने साहित्यिक चर्चाओं को नया आयाम दिया। प्रमुख आकर्षण था प्रोफेसर प्रमोद के. नायर का मुख्य भाषण, जिसमें उन्होंने उत्तर-औपनिवेशिक कविता में संकट को सामाजिक और पर्यावरणीय संरचनाओं से जोड़कर गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया। इसके अलावा उल्का अज़रिया और अनिंद्य एस. पुरकायस्थ ने सत्ता, लिंग और राज्य के अंतर्संबंधों के संदर्भ में साहित्य के प्रभावों पर महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ की।
सम्मेलन में शोध पत्रों की प्रस्तुति और छात्रों के साथ सक्रिय चर्चा ने विचारों के आदान-प्रदान को और समृद्ध किया। मूसलाधार बारिश के बावजूद यह आयोजन सफल रहा और साहित्य के माध्यम से सामाजिक और पर्यावरणीय संकटों को समझने और उनका सामना करने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हुआ।
कार्यवाहक प्राध्यापक सत्य रंजन घोष ने कहा “यह सम्मेलन साहित्य को समय के घावों की पहचान करने और उन्हें विश्लेषित करने के एक मंच के रूप में स्थापित करने में सफल रहा।” यह आयोजन दक्षिण एशियाई साहित्यिक शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान है और संकट एवं संवेदनशीलता को समझने के लिए एक नया दृष्टिकोण प्रदान करता है।




















































